स्थान : चकराता, जौनसार-बावर (देहरादून)
तिथि : 13 जनवरी 2026
हिमालय की गोद में बसे जौनसार-बावर क्षेत्र के चकराता में इस बार सर्दी ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद अब तक सीजन की पहली बर्फबारी नहीं हुई है। दिन में अधिकतम तापमान करीब 5 डिग्री सेल्सियस और रात में न्यूनतम तापमान माइनस 4 डिग्री तक पहुंच जाने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
रात के समय गिरने वाला जबरदस्त पाला सुबह के वक्त पूरे इलाके को बर्फबारी जैसा दृश्य प्रदान कर रहा है। खेत, सड़कें, आंगन और पेड़-पौधे सफेद परत से ढके नजर आते हैं। पाले के कारण पेड़-पौधे झुलस रहे हैं, जिससे खेती और बागवानी को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
कड़ाके की ठंड के चलते मवेशियों के लिए चारा-पत्ती लाना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है। सुबह और शाम के समय ठंड का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि यह पहला मौका है जब जनवरी के मध्य तक न तो वर्षा हुई और न ही बर्फबारी, जबकि आमतौर पर नवंबर या दिसंबर के अंत तक चकराता में बर्फ गिर जाया करती थी।
स्थानीय निवासियों नरेंद्र सिंह, सालक राम, प्रताप सिंह चौहान, राम सिंह, दिनेश चांदना, तरुण कुकरेजा, मोनित दुसेजा और कमल रावत का कहना है कि बीते वर्षों में नए साल से पहले बर्फबारी के कारण यहां आने वाले पर्यटक खुश होकर लौटते थे। इस बार मौसम की बेरुखी ने न केवल पर्यटन को प्रभावित किया है, बल्कि लोगों की दिनचर्या भी बदल दी है।
ऊंचाई वाले गांवों में हालात और भी गंभीर हैं। नदी-नाले, प्राकृतिक जलस्रोत और यहां तक कि पेयजल आपूर्ति की लाइनें तक जमने लगी हैं, जिससे पानी का संकट गहराता जा रहा है। कड़ाके की ठंड के कारण लोग पर्व-त्योहार भी घरों के भीतर सीमित रूप में मनाने को मजबूर हैं। माघ मरोज पर्व का उल्लास भी इस बार घरों की चारदीवारी तक सिमट कर रह गया है।
बागवानी से जुड़े महावीर रावत, महाबल सिंह नेगी, यशपाल रावत, बृजेश कुमार जोशी, गौरव चौहान और देवेंद्र चौहान का कहना है कि पाले के कारण सेब, पुलम, आडू और चुलू जैसे फलों के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इससे आने वाले मौसम में उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की प्रबल आशंका है। इसके साथ ही अत्यधिक ठंड से बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर देखा जा रहा है।
निष्कर्ष:
चकराता में इस बार की रिकॉर्ड सर्दी ने मौसम के बदले मिजाज की साफ झलक दिखाई है। बिना बर्फबारी के लगातार गिरता तापमान, पाले का कहर और पानी का संकट क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। यदि जल्द ही वर्षा या बर्फबारी नहीं हुई, तो इसका असर खेती, बागवानी, पर्यटन और जनस्वास्थ्य पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।


