जौलीग्रांट (देहरादून), 3 मार्च 2026
जौलीग्रांट के थानो क्षेत्र में स्थित एक कथित विवादित धार्मिक स्थल को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया। मंगलवार को विभिन्न हिंदू संगठनों ने थानो क्षेत्र में जुलूस निकालकर धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
निर्माण को लेकर प्रशासन पर पक्षपात का आरोप
हिंदू संगठनों का कहना है कि थानो क्षेत्र में बने एक धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर पहले ही प्रशासन से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद प्रशासन ने निर्माण के एक हिस्से को सील कर दिया था, लेकिन दूसरे हिस्से को यथावत छोड़ दिया गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अधूरा एक्शन लेकर प्रशासन ने मामले को लटकाने की कोशिश की है। उन्होंने मांग की कि पूरे निर्माण की निष्पक्ष जांच कर पूर्ण कार्रवाई की जाए।
पिछले सप्ताह भी हुआ था प्रदर्शन
गौरतलब है कि बीते मंगलवार को भी बड़ी संख्या में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर एकत्रित हुए थे और विवादित स्थल की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। उस समय पुलिस ने एहतियातन बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था।
मंगलवार को दोबारा प्रदर्शन के दौरान भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई।
भारी पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग से रोका गया मार्च
आज के प्रदर्शन को देखते हुए थानो क्षेत्र में सुबह से ही सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। प्रदर्शनकारियों को विवादित स्थल की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी को भी शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद नियमों के तहत कार्रवाई की गई थी और निर्माण के एक हिस्से को सील किया गया है। मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
निष्कर्ष
थानो क्षेत्र में विवादित धार्मिक स्थल को लेकर बढ़ता तनाव प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। एक ओर जहां हिंदू संगठन पूरी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए जांच प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।
ऐसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और संवाद ही स्थायी समाधान का रास्ता खोल सकते हैं। फिलहाल पुलिस की सतर्कता से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।


