स्थान: कलियर, रुड़की (उत्तराखंड)
तारीख: 15 जुलाई 2025
बाबा निकला 20 साल से लापता बेटा! ऑपरेशन कालनेमि में बड़ा खुलासा
उत्तराखंड में चल रहे “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत कलियर पुलिस को एक ऐसी सफलता हाथ लगी जिसने एक बिछड़े परिवार को दो दशकों बाद फिर से मिला दिया।
पुलिस ने जब बेहरूपिए बाबाओं के खिलाफ अभियान चलाकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया, तब उनमें से एक की पहचान जितेंद्र (40), पुत्र कुंवरपाल के रूप में हुई, जो साल 2005 से लापता था। हिरासत के दौरान उसकी पहचान का खुलासा हुआ तो पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बिलारी थाने से संपर्क कर परिवार का पता लगाया। जानकारी मिलते ही परिजन थाने पहुंचे और 20 साल बाद अपने बेटे को देखकर भावुक हो उठे।
20 साल पहले घर से गया था, बाबा बनकर मिला
- नाम: जितेंद्र (40)
- मूल निवासी: दलपतपुर, थाना बिलारी, जिला मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश)
- लापता तिथि: वर्ष 2005
- वर्तमान में: कलियर में तंत्र-मंत्र दिखाने वाला ‘बाबा’
जितेंद्र ने उत्तराखंड आकर बाबा का वेश धारण कर लिया था और खुद को तांत्रिक बताकर लोगों को भ्रमित करता था।
ऑपरेशन कालनेमि के तहत 3 भेषधारी बाबा गिरफ्तार
कलियर थाना पुलिस ने मंगलवार को तीन भेषधारी बाबाओं को पकड़ा, जिनकी पहचान निम्नानुसार हुई:
- जितेंद्र (40) – यूपी के मुरादाबाद से
- जैद (21) – निवासी नबाबगंज, सहारनपुर (निकट मदीना मस्जिद)
- रण सिंह (56) – निवासी हीरा सिंह थाना, अंबाला (हरियाणा)
ये सभी कांवड़ यात्रा के दौरान साधु बनकर लोगों को झूठे तंत्र-मंत्र, जादू-टोना दिखाकर ठगने का प्रयास कर रहे थे।
पुलिस ने घर का पता लगाकर दी खुशखबरी
कलियर पुलिस ने जब जांच में पाया कि जितेंद्र का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है लेकिन वह काफी वर्षों से परिवार से दूर है, तो उन्होंने लोकल यूपी थाना बिलारी से जानकारी प्राप्त कर उसके परिजनों को सूचना दी।
परिजन जैसे ही कलियर थाने पहुंचे, भावनाओं का ज्वार फूट पड़ा।
“हमें उम्मीद नहीं थी कि जितेंद्र कभी वापस मिलेगा। हम पुलिस के आभारी हैं।”
— परिवार के सदस्य की प्रतिक्रिया
क्या कर रहे थे ये ‘ढोंगी बाबा’?
पुलिस के मुताबिक ये लोग:
- कांवड़ियों के वेश में थे
- सड़कों व धर्म स्थलों के पास डेरा डालते थे
- लोगों को तंत्र, टोटके और झाड़-फूंक दिखाकर आकर्षित करते
- नकली साधु बनकर धार्मिक आस्था का गलत फायदा उठा रहे थे
ऑपरेशन कालनेमि: क्या है ये अभियान?
- उत्तराखंड पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान
- धार्मिक वेशभूषा में छिपे फर्जी बाबाओं और तांत्रिकों की पहचान
- आस्था के नाम पर ठगी और अंधविश्वास फैलाने वालों पर सख्ती


