प्रदेश के फलों पर ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखाई दे रहा रहै। कहीं बागवानी का क्षेत्र घटा तो कहीं उत्पादन आधा हो गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ के पेड़-पौधे जलवायु परिवर्तन से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं।
पहाड़ों पर इस बार बुरांश समय से पहले खिल गया, इससे वैज्ञानिक चिंतित थे ही, अब उत्तराखंड के पहाड़ों से सेब, आड़ू, आलूबुखारा, नाशपाती भी गायब होने लगे हैं। पर्वतीय ट्री लाइन हर साल कई फीट ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर शिफ्ट होने लगी है। वैज्ञानिक इसकी वजह ग्लोबल वार्मिंग बता रहे हैं। इसका असर पहाड़ के देवदार से लेकर मैदान में आम के पेड़ों तक दिखने लगा है।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट से पता चला है कि पूर्वी हिमालय में खासकर सर्दियों और वसंत के दौरान तापमान बढ़ रहा है। जिससे देवदार के पेड़ों में 38 फीसदी तक की गिरावट आई है और वृक्षरेखा अधिक ऊंचाई की ओर स्थानांतरित हो रही है। इस परिवर्तन से जहां बुग्यालों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। वहीं मैदान में भी पेड़ पौधे सुरक्षित नहीं हैं। कई जगह आम के पेड़ों में बौरों का आना जल्दी शुरू हो गया था।


