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Uttarakhand News: गैरसैंण में 9 मार्च से विधानसभा सत्र, कांग्रेस अध्यक्ष बोले– जन मुद्दों से भाग रही सरकार

देहरादून, 20 फरवरी 2026


उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा में आगामी 9 मार्च से बजट सत्र आयोजित होने जा रहा है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार पर सदन में जन मुद्दों पर जवाब देने से बचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर कर रही है और प्रश्नकाल से दूरी बना रही है।


9 से 13 मार्च तक चलेगा सत्र

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि विधानसभा का बजट सत्र 9 से 13 मार्च तक प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्र के लिए केवल पांच दिन निर्धारित किए हैं, जो कि बेहद कम हैं।

कांग्रेस विधायकों की मांग है कि बजट सत्र कम से कम एक माह तक चलाया जाए, ताकि सभी 70 विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं और जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन में उठा सकें।


सोमवार को प्रश्नकाल नहीं होने पर सवाल

गणेश गोदियाल ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में एक बार भी सोमवार को प्रश्नकाल निर्धारित नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सोमवार को मुख्यमंत्री की ओर से जवाब देने का दिन तय रहता है, लेकिन प्रश्नकाल उसी दिन नहीं रखा गया, जिससे महत्वपूर्ण सवालों से बचा जा सके।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति बताया।


प्रश्नकाल को बताया लोकतंत्र की आत्मा

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में प्रश्नकाल महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। सदन में पूछे गए प्रश्नों के माध्यम से सरकार की नीतियों, फैसलों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार संवाद और जवाबदेही से दूर भागेगी तो जनता के मन में अविश्वास की भावना पैदा होगी।


जनहित के मुद्दे उठाने का संकल्प

गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी सदन के भीतर और बाहर जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना ही होगा।


निष्कर्ष

गैरसैंण में होने वाला यह बजट सत्र राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। एक ओर सरकार सीमित अवधि के सत्र को पर्याप्त बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विमर्श को सीमित करने की कोशिश करार दे रहा है। अब देखना होगा कि भराड़ीसैंण की पहाड़ियों में गूंजने वाली यह बहस राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।

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