देहरादून | 21 फरवरी 2026
उत्तराखंड सहित देशभर में संचालित निजी पर्यटक परमिट वाहनों के लिए केंद्र सरकार ने बड़े नियम बदलाव की घोषणा की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी “अखिल भारतीय पर्यटक यान (परमिट) संशोधन नियम, 2026” एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के तहत अब निजी परमिट वाहन केवल अपने गृह राज्य (होम स्टेट) से ही अपनी यात्रा शुरू कर सकेंगे।
होम स्टेट से यात्रा अनिवार्य, 60 दिन से ज्यादा बाहर रहने पर रोक
नई नियमावली के अनुसार जिस राज्य से वाहन को परमिट जारी किया गया है, वही उसका होम स्टेट माना जाएगा। अब प्रत्येक पर्यटक वाहन के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह अपनी यात्रा की शुरुआत अपने गृह राज्य से ही करे।
इसके साथ ही, कोई भी वाहन अपने राज्य के बाहर लगातार 60 दिनों से अधिक नहीं रह सकेगा। यदि वाहन इस अवधि से अधिक समय तक दूसरे राज्य में पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
टोल बकाया होने पर नहीं मिलेगा परमिट
सरकार ने परमिट प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए एक और अहम प्रावधान जोड़ा है। अब परमिट के लिए आवेदन करते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित वाहन पर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई टोल टैक्स बकाया न हो।
यदि टोल बकाया पाया गया तो परमिट जारी नहीं किया जाएगा। इससे सरकार को राजस्व वसूली में भी मदद मिलेगी और नियमों का पालन सुनिश्चित होगा।
परमिट अवधि 12 से बढ़ाकर 15 वर्ष
संशोधित नियमों के तहत अखिल भारतीय पर्यटक वाहन परमिट की वैधता अवधि को 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया है। इससे वाहन संचालकों को कुछ राहत मिलेगी और उन्हें बार-बार परमिट नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
आधार, सीआईएन और जीएसटी नंबर अनिवार्य
नियमों में पारदर्शिता और सत्यापन को मजबूत करने के लिए अब व्यक्तिगत आवेदकों को आधार नंबर देना अनिवार्य होगा।
वहीं, कंपनियों या फर्मों के लिए कॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN) या जीएसटी नंबर देना जरूरी किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवेदक का व्यवसाय उसी राज्य में संचालित हो रहा है, जहां वाहन पंजीकृत है।
उत्तराखंड में क्या होगा असर?
राजधानी देहरादून सहित राज्य के कई शहरों से बड़ी संख्या में पर्यटक वाहन अन्य राज्यों के लिए संचालित होते हैं। नए नियम लागू होने के बाद परिवहन विभाग को निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से फर्जी पंजीकरण, टैक्स चोरी और अनियमित संचालन पर लगाम लगेगी, हालांकि कुछ ऑपरेटरों को प्रारंभिक स्तर पर संचालन व्यवस्था में बदलाव करना पड़ेगा।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार द्वारा किए गए ये संशोधन निजी पर्यटक वाहनों के संचालन को अधिक संगठित, पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन नियमों के बाद देशभर के वाहन संचालकों को अपनी संचालन रणनीति में बदलाव करना होगा, जबकि यात्रियों पर इसका सीधा प्रभाव सेवा संचालन के ढांचे में दिखाई दे सकता है।


