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Uttarakhand News | फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा: 9,428 फर्जी आयुष्मान कार्ड पकड़े गए, मुकदमा दर्ज – करोड़ों का हुआ नुकसान

देहरादून, 5 जुलाई 2025

आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला देहरादून में सामने आया है, जहां 9,428 फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर करोड़ों रुपये का स्वास्थ्य लाभ उठा लिया गया। इस खुलासे ने राज्य की स्वास्थ्य और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


कहां से शुरू हुआ फर्जीवाड़ा?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू हुए विशेष सत्यापन अभियान के तहत देहरादून जिले में 1,36,676 राशन कार्ड अनियमितता के चलते निरस्त किए गए।
इन्हीं रद्द राशन कार्डों के आधार पर बड़ी संख्या में फर्जी आयुष्मान कार्ड बना दिए गए और योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का लाभ भी लिया गया।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) ने जब जिला खाद्य आपूर्ति कार्यालय से मिले डेटा का मिलान किया तो 9,428 ऐसे आयुष्मान कार्ड पाए गए जो निरस्त राशन कार्डों के आधार पर बनाए गए थे।


मुकदमा दर्ज, जांच शुरू

राजपुर थाना, देहरादून में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अतिरिक्त निदेशक (आईटी) अमित शर्मा की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
अब तक इनमें से 150 कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि शेष कार्डों को भी जल्द रद्द करने की कार्रवाई चल रही है।


आयुष्मान योजना में कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

  • राशन कार्ड आयुष्मान कार्ड के लिए अनिवार्य दस्तावेज है।
  • अपात्र लोगों ने फर्जी राशन कार्ड बनवाए।
  • जब ये कार्ड ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हुए तो ऑटोमेटिक रूप से आयुष्मान कार्ड जनरेट हो गए।
  • इन कार्डों से मुफ्त इलाज, सर्जरी और अन्य मेडिकल सेवाओं का कई लाख रुपये का लाभ लिया गया।

क्या हो रहा है अब?

  • पुलिस फर्जी कार्ड धारकों को चिह्नित कर रही है।
  • SHA यह पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने इस फर्जीवाड़े के तहत वास्तविक लाभ लिया
  • दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

क्या बोले अधिकारी?

अमित शर्मा (अतिरिक्त निदेशक, SHA):

“ये एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा है, जिसमें अपात्र व्यक्तियों ने सरकारी योजना का अनुचित लाभ लिया। जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”


सावधान!

इस मामले ने राज्य की डिजिटल निगरानी व्यवस्था और लाभार्थी सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह भी जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन, खाद्य आपूर्ति विभाग और स्वास्थ्य प्राधिकरण मिलकर यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसा फर्जीवाड़ा न दोहराया जाए।


फर्जी योजनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई होगी। आम जनता से भी अपील है कि वे अपने दस्तावेज़ों की वैधता जांच लें और किसी भी फर्जीवाड़े में शामिल न हों।

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