देहरादून | 12 मई 2026
राजधानी देहरादून में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के मौके पर नर्सिंग बेरोजगारों का आंदोलन और तेज हो गया है। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग अभ्यर्थियों में से कुछ पिछले 37 घंटे से अधिक समय से परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़े हुए हैं, जबकि उनके अन्य साथी नीचे धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने में शामिल महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पानी की टंकी पर मौजूद हैं। लगातार बदलते मौसम, तेज धूप और बारिश के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी बेरोजगार नर्सों में निराशा और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है।
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि आज सुबह से उन्हें अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस की शुभकामनाएं मिल रही हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वे इन शुभकामनाओं को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रहे हैं।
नवल पुंडीर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलनकारियों के साथ तानाशाही जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी की टंकी पर मौजूद प्रदर्शनकारियों तक खाना और पानी पहुंचाने में भी बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन अब केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार दोपहर स्वास्थ्य महानिदेशिका के साथ नर्सिंग एकता मंच की वार्ता प्रस्तावित है। यदि इस बैठक में कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है, तो आंदोलन को और उग्र करने की रणनीति बनाई जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग वर्षवार नियुक्ति प्रक्रिया लागू करने की है, ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे नर्सिंग अभ्यर्थियों को रोजगार मिल सके।
नवल पुंडीर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस उन लोगों के लिए खुशी का दिन हो सकता है, जिन्हें रोजगार मिल चुका है, लेकिन बेरोजगार नर्सों के लिए यह दिन “ब्लैक डे” जैसा है। उन्होंने कहा कि समाज में नर्सों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और सरकार को इस विशेष दिन पर बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों को नियुक्ति का उपहार देना चाहिए था।
धरने पर बैठीं मधु उनियाल ने कहा कि पिछले 159 दिनों से नर्सिंग अभ्यर्थी वर्षवार नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार अब तक उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि फोन पर मिल रही नर्स दिवस की शुभकामनाएं उनके जख्मों पर मरहम नहीं, बल्कि पीड़ा बढ़ाने का काम कर रही हैं।
इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा भी आंदोलन स्थल पहुंचे और प्रदर्शनकारी नर्सों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में लगातार धांधली और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, जिससे युवाओं का भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है। उन्होंने सरकार पर बेरोजगार नर्सों की जायज मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
करन माहरा ने कहा कि इससे पहले भी नर्सिंग अभ्यर्थी लगभग 160 दिनों तक एकता विहार स्थित धरना स्थल पर आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि महिला सम्मान की बात करने वाली सरकार को उन महिलाओं की पीड़ा भी समझनी चाहिए, जो पिछले कई घंटों से पानी की टंकी पर बैठकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रही हैं।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर देहरादून में चल रहा यह आंदोलन राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और रोजगार नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थी रोजगार की मांग को लेकर सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। अब सबकी नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ होने वाली वार्ता पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि आंदोलन शांत होगा या आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा।


