स्कूटी की वैधता और मंत्री काफिले को लेकर उठे सवाल, मंत्री ने दी सफाई
देहरादून | 11 मई 2026
उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सोमवार को उस समय चर्चा का केंद्र बन गए, जब वह सरकारी गाड़ियों के बजाय स्कूटी चलाकर अपने कैंप कार्यालय पहुंचे। मंत्री का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत के संदेश को आम जनता तक पहुंचाना था, लेकिन यह पहल सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का कारण बन गई।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच उत्तराखंड के कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने ईंधन संरक्षण और सादगी का संदेश देने के लिए अनोखी पहल की। गढ़ी कैंट क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद उन्होंने अपने सरकारी वाहन का उपयोग नहीं किया और स्कूटी से कैंप कार्यालय पहुंचे।
मंत्री की इस पहल को शुरुआत में पेट्रोल-डीजल बचाने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के रूप में देखा गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया ऊर्जा संसाधनों को लेकर चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे में प्रत्येक नागरिक को ईंधन के अनावश्यक उपयोग से बचना चाहिए।
गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा संरक्षण, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के संतुलित उपयोग का आह्वान करते रहे हैं। उसी संदेश को व्यवहार में उतारने के उद्देश्य से उन्होंने दोपहिया वाहन का इस्तेमाल किया।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि छोटी दूरी के लिए निजी चार पहिया वाहनों की बजाय दोपहिया वाहन, सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहनों का उपयोग किया जाए। इससे न केवल ईंधन की खपत कम होगी, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या में भी राहत मिलेगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। यदि हर नागरिक छोटे-छोटे प्रयास करे तो उसका बड़ा प्रभाव दिखाई देगा।
हालांकि, मंत्री की यह पहल जल्द ही सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बन गई। जिस स्कूटी पर मंत्री सवार थे, उसका इंश्योरेंस वैध नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने यातायात नियमों के उल्लंघन को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
इतना ही नहीं, लोगों ने मंत्री के पीछे चल रहे सरकारी काफिले और वीडियो शूट करने वाली गाड़ियों पर भी सवाल खड़े किए। सोशल मीडिया यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ मंत्री ईंधन बचत का संदेश दे रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ उनके साथ कई गाड़ियां चल रही थीं।
मामला बढ़ने पर मंत्री गणेश जोशी को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने ओएसडी की स्कूटी का उपयोग प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए किया था।
मंत्री ने कहा,
“आज मैंने अपने ओएसडी की स्कूटी उसी समय के लिए ली थी। जहां तक इंश्योरेंस की बात है, उसका नवीनीकरण प्रक्रिया में था और अब इंश्योरेंस रिन्यू हो चुका है। मेरा उद्देश्य केवल एक प्रतीकात्मक संदेश देना था।”
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में वह स्थानीय दौरों और कम दूरी के कार्यक्रमों में दोपहिया वाहन का अधिक इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। हालांकि लंबी दूरी की यात्राओं के लिए कार का उपयोग आवश्यक रहेगा।
गणेश जोशी ने यह भी संकेत दिए कि मंत्री काफिले में वाहनों की संख्या कम करने पर भी विचार किया जाएगा। उनका कहना था कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं सादगी अपनाएंगे तो समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
निष्कर्ष
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की स्कूटी यात्रा का उद्देश्य भले ही ईंधन संरक्षण और पर्यावरण बचाने का संदेश देना था, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में यह पहल सवालों और विवादों में घिर गई। स्कूटी के इंश्योरेंस और सरकारी काफिले को लेकर उठे सवालों ने इस अभियान की गंभीरता पर बहस छेड़ दी। हालांकि मंत्री ने इसे प्रतीकात्मक पहल बताते हुए सफाई दी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने नेताओं की सार्वजनिक छवि और व्यवहारिक संदेशों के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।


