ऋषिकेश/देहरादून | 6 जुलाई 2026
ऋषिकेश की विस्थापित कॉलोनी में नशे की लत के कारण सामने आई दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया है। नशा करने से रोकने पर बेटे द्वारा अपनी ही बुजुर्ग माँ को गोली मारने की घटना पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पुलिस अधिकारियों को आरोपी के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेश में अवैध नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता एवं कार्रवाई अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऋषिकेश की विस्थापित कॉलोनी में रहने वाले नशे के आदी आरोपी सुमित गौड़ ने अपनी 63 वर्षीय माता ऊषा देवी द्वारा नशा करने से रोकने पर तमंचे से उनके सिर में गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश देखा गया।
घटना की जानकारी विभिन्न समाचार माध्यमों से मिलने के बाद उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने तत्काल ऋषिकेश के प्रभारी निरीक्षक (एसओ) से दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने निर्देश दिए कि आरोपी के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं अस्पताल जाकर घायल बुजुर्ग महिला का हालचाल लेंगी और परिवार से मुलाकात करेंगी।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने इस घटना को केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों पर गंभीर प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि जिस बेटे को माँ ने जीवन दिया, उसी द्वारा नशे के कारण माँ पर जानलेवा हमला किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि अवैध नशाखोरी समाज और परिवारों को भीतर से खोखला कर रही है।
कुसुम कण्डवाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में नशे के बढ़ते प्रभाव को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य महिला आयोग अब अपने स्तर पर अवैध नशे के विरुद्ध एक व्यापक जनआंदोलन की शुरुआत करेगा, जिसमें जनजागरूकता के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना, परिवारों को जागरूक करना और समाज को इस गंभीर समस्या के प्रति संवेदनशील बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ने हमेशा सामाजिक सुधार और जनहित के आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाई है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महिला आयोग प्रदेशभर की महिलाओं को इस अभियान से जोड़ेगा। पुलिस प्रशासन और स्थानीय महिलाओं के सहयोग से गांव-गांव और शहर-शहर में अवैध नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि समाज के हर वर्ग तक इसका संदेश पहुंच सके।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि इस विशेष अभियान की शुरुआत वह स्वयं अपने गृह नगर ऋषिकेश से करेंगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जाएगा। अभियान में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला समूहों, युवाओं और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि अवैध नशे के खिलाफ प्रभावी जनसहयोग तैयार हो सके।
निष्कर्ष
ऋषिकेश में नशे की लत के कारण माँ पर हुए जानलेवा हमले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि समाज में बढ़ती नशाखोरी किस तरह परिवारों को बर्बादी की ओर धकेल रही है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा इस मामले में त्वरित संज्ञान, सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश और प्रदेशव्यापी नशा विरोधी अभियान की घोषणा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। अब सभी की नजर पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ उस जनअभियान पर रहेगी, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड को नशामुक्त और सुरक्षित समाज की ओर अग्रसर करना है।


