देहरादून | 14 जनवरी 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन ने शस्त्र लाइसेंस को लेकर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 827 लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। यह कदम उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है, जो शस्त्र लाइसेंस को सुरक्षा की जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक रुतबे और दिखावे का माध्यम मान बैठे थे।
जिला प्रशासन की विस्तृत जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस धारकों ने नियमों की अनदेखी की। कई लोगों के पास निर्धारित सीमा से अधिक हथियार पाए गए, जबकि सैकड़ों लाइसेंस धारकों ने वर्षों से नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) और आर्म्स लाइसेंस इश्यूएंस सिस्टम (एएलआईएस) पोर्टल पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) जनरेट तक नहीं कराया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि कानून द्वारा दी गई सशर्त अनुमति है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य जिले में शस्त्रों के अनावश्यक और अवैध प्रसार पर रोक लगाना है।
निर्धारित सीमा से अधिक हथियार रखने पर कार्रवाई
उत्तराखंड शासन के निर्देशों के क्रम में देहरादून जिले में दो से अधिक शस्त्र रखने वालों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया। इस दौरान 26 अप्रैल 2025 को ऐसे सभी लाइसेंस धारकों को नोटिस जारी कर अतिरिक्त हथियार हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद 54 लोगों ने न तो जवाब दिया और न ही निर्धारित अवधि में नियमों का पालन किया।
जांच में पाया गया कि इन 54 लाइसेंस धारकों के नाम एनडीएएल–एएलआईएस पोर्टल पर दो से अधिक शस्त्र दर्ज थे। जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी ने शूटिंग खेल प्रतियोगिताओं के लिए स्वीकृत लाइसेंस को छोड़ते हुए, इन सभी के अतिरिक्त शस्त्रों और संबंधित लाइसेंसों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। साथ ही पोर्टल से संबंधित प्रविष्टियां भी हटा दी गईं।
यूआईएन न बनवाना पड़ा भारी
जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड शासन के 03 मई 2017, 09 मार्च 2023 और 03 सितंबर 2025 के शासनादेशों में स्पष्ट किया गया है कि 30 जून 2020 के बाद जिन शस्त्र लाइसेंसों में यूआईएन जनरेट नहीं है, उन्हें निरस्त किया जाना अनिवार्य है। ऐसे मामलों में धारकों को आयुध नियम–2016 के तहत नए सिरे से आवेदन करना होता है।
जिला प्रशासन ने कई बार बिना यूआईएन वाले शस्त्र लाइसेंस धारकों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया, लेकिन लापरवाही बरतने वालों की संख्या कम नहीं हुई। अंततः जांच में 773 ऐसे लाइसेंस पाए गए, जिनमें यूआईएन दर्ज नहीं था। शासनादेशों के अनुपालन में इन सभी लाइसेंसों को निरस्त कर एनडीएएल–एएलआईएस पोर्टल से हटा दिया गया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो टूक कहा कि नियमों के दायरे में शस्त्र रखने वालों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन खुद को कानून से ऊपर समझने वालों पर प्रशासन की निगरानी और सख्ती अब और बढ़ेगी।
निष्कर्ष:
देहरादून में हुई यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि हथियार सुरक्षा के लिए हैं, दिखावे और झूठी शान के लिए नहीं। नियमों का पालन न करने वालों को अब किसी भी स्तर पर रियायत नहीं मिलेगी, और शस्त्र लाइसेंस व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में प्रशासन का यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।


