देहरादून | 16 सितंबर 2026
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में पिछले नौ दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे पीजी रेजिडेंट और जेआर डॉक्टरों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के साथ हुई बातचीत और मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने यह फैसला लिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों से की मुलाकात
धरनास्थल पर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने आंदोलनरत पीजी रेजिडेंट और जेआर डॉक्टरों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों की समस्याओं और स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को विस्तार से सुना। बातचीत के दौरान मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डॉक्टर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके हितों और समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद और समन्वय के माध्यम से डॉक्टरों की मांगों का समाधान निकालने के लिए प्रयास कर रही है।
आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने लिया धरना स्थगित करने का निर्णय
मंत्री के आश्वासन के बाद पीजी रेजिडेंट और जेआर डॉक्टरों ने अपना धरना फिलहाल निश्चित अवधि के लिए स्थगित करने का फैसला किया। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की ओर से मांग पर जल्द फैसला लेने का भरोसा दिया गया है, इसलिए फिलहाल आंदोलन को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
हालांकि, स्टाइपेंड में वास्तविक बढ़ोतरी कब और कितनी होगी, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। ऐसे में डॉक्टरों की नजर अब सरकार की आगामी कार्रवाई पर बनी हुई है।
71 हजार मिल रहा स्टाइपेंड, 1.10 लाख की मांग
पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर है। वर्तमान में उन्हें करीब 71 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा महंगाई और प्रशिक्षण के दौरान बढ़ते खर्च को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है।
पीजी रेजिडेंट डॉक्टर स्टाइपेंड को बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में धरना शुरू किया था।
अब स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने आंदोलन स्थगित कर दिया है, लेकिन सरकार की ओर से औपचारिक निर्णय का इंतजार जारी है।
एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में हो चुकी है बढ़ोतरी
इससे पहले सरकार एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को मंजूरी दे चुकी है। 11 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 17 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की ओर से स्टाइपेंड को 30 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग रखी गई थी, लेकिन कैबिनेट ने 25 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि को मंजूरी दी।
इंटर्न डॉक्टरों ने भी स्थगित किया था आंदोलन
स्टाइपेंड बढ़ाने के फैसले के बाद एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने अपना धरना और कार्यबहिष्कार स्थगित कर दिया था। वहीं, पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर कैबिनेट बैठक में कोई निर्णय नहीं होने के कारण उनका आंदोलन जारी रहा।
अब स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई वार्ता के बाद पीजी डॉक्टरों ने भी धरना स्थगित कर दिया है। इससे अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं पर आंदोलन के कारण पड़ रहे संभावित असर को कम करने में मदद मिलेगी।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर
पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों ने फिलहाल सरकार के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए आंदोलन रोक दिया है। हालांकि, उनकी मूल मांग 1.10 लाख रुपये स्टाइपेंड की है और इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसले से ही स्पष्ट होगा कि डॉक्टरों की मांग किस स्तर तक स्वीकार की जाती है।
निष्कर्ष
नौ दिनों से चल रहे पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों के धरने को स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद फिलहाल विराम मिल गया है। सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाने पर जल्द सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है। अब डॉक्टरों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर सरकार के औपचारिक फैसले पर है।


