देहरादून | 6 जुलाई 2026
उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के तहत राज्य में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 8.41 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की संभावना है। यदि प्री-एसआईआर के दौरान हटाए गए नामों को भी जोड़ दिया जाए तो कुल 13.36 लाख से अधिक मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं, जिसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।
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2022 के मुकाबले लगभग 10 लाख कम हो सकते हैं मतदाता
निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 तक उत्तराखंड में 84.55 लाख मतदाता पंजीकृत थे। एसआईआर के पहले चरण के बाद यह संख्या घटकर 71.16 लाख तक पहुंचने की संभावना है।
यदि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना की जाए, तब राज्य में लगभग 81.43 लाख मतदाता थे। ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव तक मतदाताओं की संख्या में करीब 10 लाख की कमी देखने को मिल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर मतदाताओं की संख्या में बदलाव कई विधानसभा सीटों के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।
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7 जुलाई को पूरा होगा पहला चरण
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार राज्य में 8 जून 2026 से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू किया गया था। पहले चरण के अंतर्गत बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया और गणना प्रपत्र एकत्र किए। यह चरण 7 जुलाई 2026 को पूरा हो रहा है।
इस दौरान सभी 79.60 लाख पंजीकृत मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए गए थे, जिनमें से 71.16 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त कर डिजिटलाइज कर दिए गए हैं।
89.40 प्रतिशत गणना फॉर्म हुए डिजिटलाइज
निर्वाचन विभाग के अनुसार राज्यभर में अब तक 89.40 प्रतिशत गणना प्रपत्र डिजिटलाइज किए जा चुके हैं।
जिलेवार स्थिति इस प्रकार है—
- हरिद्वार – 12,43,372 मतदाता (90.33%)
- नैनीताल – 6,93,052 मतदाता (90.58%)
- अल्मोड़ा – 4,71,493 मतदाता (89.40%)
- ऊधमसिंह नगर – 11,51,183 मतदाता (86.34%)
- पिथौरागढ़ – 3,41,318 मतदाता (92.51%)
- बागेश्वर – 2,00,839 मतदाता (93.88%)
- चंपावत – 1,88,815 मतदाता (91.37%)
- चमोली – 2,71,963 मतदाता (92.00%)
- उत्तरकाशी – 2,24,266 मतदाता (92.36%)
- रुद्रप्रयाग – 1,80,612 मतदाता (94.27%)
- टिहरी गढ़वाल – 4,63,191 मतदाता (91.31%)
- पौड़ी गढ़वाल – 5,01,441 मतदाता (90.38%)
- देहरादून – 11,85,105 मतदाता (86.08%)
किन कारणों से हट सकते हैं 8.41 लाख नाम?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार एसआईआर के दौरान 8,41,020 मतदाता एएसडी (Absent, Shifted, Dead) श्रेणी में पाए गए हैं।
इनमें—
- 1,24,278 मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।
- 4,79,762 मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं।
- 61,888 मतदाता पहले से अन्य स्थान पर पंजीकृत पाए गए।
- 1,66,741 मतदाता सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले।
- 8,351 मामलों में अन्य कारण सामने आए।
इन सभी मामलों का सत्यापन पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
सबसे अधिक नाम देहरादून और ऊधमसिंह नगर में हटने की संभावना
जिलेवार संभावित विलोपन के आंकड़े भी सामने आए हैं।
- देहरादून – 1,90,815
- ऊधमसिंह नगर – 1,82,162
- हरिद्वार – 1,31,047
- नैनीताल – 72,053
- अल्मोड़ा – 55,930
- पौड़ी गढ़वाल – 53,386
- टिहरी गढ़वाल – 44,062
- पिथौरागढ़ – 27,615
- चमोली – 23,631
- उत्तरकाशी – 18,470
- चंपावत – 17,827
- बागेश्वर – 13,090
- रुद्रप्रयाग – 10,902
प्री-एसआईआर में भी हट चुके हैं लगभग पांच लाख नाम
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार एसआईआर शुरू होने से पहले ही प्री-एसआईआर प्रक्रिया में 4,95,232 मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके थे।
यानी यदि प्री-एसआईआर और वर्तमान एसआईआर के संभावित विलोपन को जोड़ दिया जाए तो कुल 13,36,252 मतदाताओं के नाम सूची से हटने की प्रक्रिया में हैं।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि प्री-एसआईआर के दौरान डुप्लीकेट, त्रुटिपूर्ण और स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान कर रिकॉर्ड अपडेट किया गया था।
14 जुलाई को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार, एसआईआर के बाद 14 जुलाई 2026 को प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
इसके बाद नागरिकों को एक माह तक दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। यदि कोई पात्र मतदाता छूट गया है या उसका नाम गलती से हट गया है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेगा। अंतिम सूची आपत्तियों के निस्तारण के बाद प्रकाशित की जाएगी।
चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं की संख्या में इतनी बड़ी कमी आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरण बदल सकती है। वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक कुलदीप राणा का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के स्थायी रूप से अन्य राज्यों या जिलों में स्थानांतरित होने तथा मतदाता सूची के संशोधन से कई सीटों पर जीत-हार का अंतर प्रभावित हो सकता है।
विशेष रूप से देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में मतदाताओं की संख्या में आए बदलाव का प्रभाव राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति पर भी दिखाई देगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान सामने आए आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि राज्य की मतदाता सूची में इस बार व्यापक बदलाव होने जा रहा है। लाखों मतदाताओं के नाम हटने की संभावना के बीच निर्वाचन आयोग सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर रहा है, जबकि राजनीतिक दल भी मतदाता सूची पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वास्तविक मतदाता संख्या क्या होगी, लेकिन इतना तय है कि इस बदलाव का असर चुनावी गणित और राजनीतिक रणनीतियों दोनों पर दिखाई देगा।


