देहरादून/पिथौरागढ़ | 6 जुलाई 2026
उत्तराखंड कांग्रेस ने संगठन में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ी कार्रवाई करते हुए पिथौरागढ़ के तीन वरिष्ठ नेताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई 30 जून को आयोजित परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान पार्टी कार्यक्रम में कथित रूप से व्यवधान उत्पन्न करने और संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के बाद की गई है।
पार्टी से निष्कासित किए गए नेताओं में पिथौरागढ़ के पूर्व जिलाध्यक्ष महेंद्र लुंठी, महिला कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी और दीपक लुंठी शामिल हैं।
परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के बाद बढ़ा विवाद
30 जून को पिथौरागढ़ में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में परिवर्तन संकल्प सम्मेलन आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान मंच पर ही कुछ नेताओं द्वारा स्थानीय विधायक के खिलाफ सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताए जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
बताया गया कि मंच से हुई तीखी बयानबाजी के बाद स्थानीय विधायक कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए। इस घटनाक्रम ने न केवल सम्मेलन की गरिमा प्रभावित की, बल्कि पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चाओं को भी हवा दे दी।
कारण बताओ नोटिस के बाद हुई कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था।
इसी क्रम में पिथौरागढ़ जिला महिला कांग्रेस कमेटी को भी भंग कर दिया गया था। पार्टी ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिला कांग्रेस कमेटी से तलब की और वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया।
संगठन विरोधी गतिविधियों का आरोप
प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री (संगठन) राजेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में जिस प्रकार सम्मेलन के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया गया, वह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से कांग्रेस संगठन की सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है और संगठनात्मक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ है। इसी आधार पर तीनों नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है।
राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के बाद लिया गया फैसला
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसार पूरे मामले में राष्ट्रीय नेतृत्व से प्राप्त दिशा-निर्देशों और जिला इकाई की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद निष्कासन का निर्णय लिया गया।
पार्टी नेतृत्व का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठनात्मक अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता या संगठन विरोधी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चुनावी तैयारियों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। पिथौरागढ़ में हुए इस घटनाक्रम ने संभावित टिकट दावेदारों और स्थानीय संगठन के भीतर चल रही खींचतान को भी उजागर कर दिया है।
तीन प्रभावशाली नेताओं के निष्कासन के बाद जिले की राजनीतिक गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही पार्टी अब स्थानीय संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती है।
कांग्रेस का स्पष्ट संदेश
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने इस कार्रवाई के माध्यम से संगठन के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यवहार पर भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष
पिथौरागढ़ परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान हुए विवाद के बाद कांग्रेस ने तीन वरिष्ठ नेताओं को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर संगठनात्मक अनुशासन पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी आंतरिक गुटबाजी पर नियंत्रण और संगठन को मजबूत करने के प्रयास में जुटी है। ऐसे में यह कार्रवाई कांग्रेस की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक अनुशासन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


