देहरादून | 22 जुलाई 2026
उत्तराखंड में लंबे समय से चल रहे नर्सिंग भर्ती विवाद ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। नर्सिंग अभ्यर्थी द्वारा कथित आत्महत्या के प्रयास की घटना के बाद राजधानी देहरादून में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के सरकारी आवास के बाहर महिला कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई और मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
आत्महत्या प्रयास की खबर के बाद भड़का आक्रोश
जानकारी के अनुसार, नर्सिंग भर्ती में सीनियरिटी के आधार पर नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रही एक महिला अभ्यर्थी ने बुधवार को कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। गंभीर स्थिति में उसे तत्काल दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उसकी हालत पर अगले 72 घंटे तक विशेष नजर रखी जा रही है।
इस घटना की सूचना मिलते ही नर्सिंग अभ्यर्थियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।
स्वास्थ्य मंत्री के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और सरकार की कार्यशैली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
स्थिति को देखते हुए मंत्री आवास के बाहर पहले से भारी पुलिस बल तैनात था। प्रदर्शन उग्र होने की आशंका के बीच पुलिस ने ज्योति रौतेला सहित कई महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर प्रदर्शन समाप्त कराया।
क्या है नर्सिंग भर्ती विवाद?
उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती को लेकर विवाद कई वर्षों से जारी है। विवाद का केंद्र भर्ती का आधार है।
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले सरकार ने सीनियरिटी के आधार पर नियुक्तियां देने का निर्णय लिया था और वर्ष 2013 तक के अभ्यर्थियों को इसका लाभ भी दिया गया। उनका तर्क है कि समान परिस्थितियों में वर्ष 2013 के बाद के अभ्यर्थियों को भी उसी नीति के तहत नियुक्ति मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर, सरकार ने बाद में भर्ती नियमावली में संशोधन करते हुए प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से भर्ती को लागू किया। सरकार का कहना है कि परीक्षा आधारित चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और योग्यता आधारित है।
अभ्यर्थियों का आरोप, नियम बदलने से भविष्य अधर में
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार नियम बदलने से हजारों प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि यदि पहले एक वर्ग को सीनियरिटी के आधार पर नियुक्ति दी जा सकती है, तो बाद के अभ्यर्थियों के साथ अलग व्यवस्था लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार से पुरानी नीति को लागू करने और भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।
सरकार पर बढ़ा दबाव, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
महिला अभ्यर्थी के आत्महत्या प्रयास के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने का दबाव बढ़ा दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो राज्यव्यापी आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
वहीं प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बनी गतिरोध की स्थिति
नर्सिंग भर्ती को लेकर फिलहाल सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है। एक ओर सरकार परीक्षा आधारित भर्ती प्रक्रिया को लागू रखने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थी सीनियरिटी के आधार पर नियुक्ति की मांग पर अड़े हुए हैं।
ऐसे में यह विवाद केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
देहरादून में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास के बाहर हुआ प्रदर्शन और नर्सिंग अभ्यर्थी के आत्महत्या प्रयास की घटना ने उत्तराखंड के नर्सिंग भर्ती विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि वह आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।


