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उत्तराखंड की नई खेल नीति बनेगी जनता की भागीदारी से, सरकार मांगेगी सुझाव; खेल विश्वविद्यालय और खिलाड़ियों की नौकरी पर भी तेज होंगे फैसले

देहरादून | 7 जुलाई 2026

उत्तराखंड सरकार प्रदेश की नई खेल नीति को अधिक प्रभावी, आधुनिक और खिलाड़ियों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब इस नीति के निर्माण में केवल विभागीय अधिकारियों की नहीं, बल्कि आम जनता, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए खेल विभाग जल्द ही एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करेगा, जहां लोग अपने सुझाव दर्ज कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि उपयोगी सुझावों को नई खेल नीति में शामिल किया जाएगा और उत्कृष्ट सुझाव देने वालों को सम्मानित भी किया जाएगा।

खेल मंत्री ने विभागीय समीक्षा बैठक में दिए महत्वपूर्ण निर्देश

मंगलवार को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई खेल नीति तैयार करते समय व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि खेल नीति केवल सरकारी दस्तावेज न होकर खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल से जुड़े सभी हितधारकों की अपेक्षाओं को प्रतिबिंबित करने वाली होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से विभाग जल्द ऑनलाइन लिंक जारी करेगा, जिसके माध्यम से प्रदेशवासी अपने सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे।

केंद्र की नीति और उत्तराखंड की पारंपरिक खेल संस्कृति का होगा समन्वय

बैठक के बाद खेल मंत्री ने बताया कि नई खेल नीति तैयार करते समय केंद्र सरकार की खेल नीति के प्रमुख प्रावधानों को शामिल किया जाएगा। साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक खेल संस्कृति और स्थानीय खेलों को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य ऐसी खेल नीति तैयार करना है, जो आधुनिक खेल सुविधाओं के विकास के साथ-साथ प्रदेश की पारंपरिक खेल विरासत को भी संरक्षित और प्रोत्साहित करे।

अच्छे सुझावों को मिलेगा नीति में स्थान और सम्मान

खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा। जो सुझाव व्यवहारिक और खिलाड़ियों के हित में होंगे, उन्हें नई खेल नीति का हिस्सा बनाया जाएगा।

इसके अलावा बेहतर और नवाचारी सुझाव देने वाले नागरिकों को सम्मानित करने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भागीदारी करें।

खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को मिलेगी रफ्तार

बैठक में उत्तराखंड में प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए, ताकि प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध की सुविधाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध हो सकें।

सरकार का मानना है कि खेल विश्वविद्यालय स्थापित होने से उत्तराखंड खेल प्रतिभाओं के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

पदक विजेता खिलाड़ियों को नौकरी देने की प्रक्रिया होगी तेज

बैठक के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी देने के मामलों की भी समीक्षा की गई।

खेल मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि पात्र खिलाड़ियों को समय पर नियुक्ति का लाभ मिल सके।

उन्होंने यह भी बताया कि कुछ पदक विजेता खिलाड़ियों को राज्य की खेल अकादमियों में समायोजित करने की योजना पर भी गंभीरता से काम किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों को रोजगार के साथ-साथ प्रदेश में नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने का अवसर भी मिलेगा।

खिलाड़ियों के हितों को केंद्र में रखकर तैयार होगी नई नीति

सरकार का उद्देश्य ऐसी खेल नीति तैयार करना है, जिसमें खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खेल अधोसंरचना, कोचिंग, रोजगार, प्रोत्साहन योजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

नई नीति में खेल सुविधाओं के विस्तार, प्रतिभा खोज कार्यक्रमों और विभिन्न खेलों के लिए आधुनिक संसाधनों के विकास जैसे विषयों को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार की नई पहल से प्रदेश की खेल नीति अधिक समावेशी और जनभागीदारी आधारित बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आम नागरिकों, खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों से सुझाव लेकर तैयार की जाने वाली यह नीति न केवल खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी, बल्कि पारंपरिक खेलों के संरक्षण, खेल विश्वविद्यालय की स्थापना और पदक विजेता खिलाड़ियों के सम्मान व रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी नई गति देगी। यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड खेल विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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