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हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद पर गणेश गोदियाल का भाजपा पर हमला, बोले—“कानून के हाथ लंबे होते हैं”, रखे तीन विकल्प

दिनांक: 5 सितंबर 2026
स्थान: देहरादून/हल्द्वानी, उत्तराखंड

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा नेताओं के खिलाफ कर्नाटक में जीरो एफआईआर दर्ज होने की खबर के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने फिल्मी अंदाज में कहा कि “कानून के हाथ हमेशा लंबे होते हैं” और अब यही कानून भाजपा नेताओं तक पहुंच गया है।

कर्नाटक में जीरो एफआईआर का किया जिक्र

देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान गणेश गोदियाल ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि बेंगलुरु में भाजपा नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है।

गोदियाल ने इस घटनाक्रम को उत्तराखंड में कांग्रेस की ओर से की गई शिकायतों और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जोड़ते हुए भाजपा पर राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सत्ता का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्रों को नजरअंदाज किया गया और राहुल गांधी के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई।

“देश एक कानून और एक संविधान से चलता है”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि भाजपा नेताओं ने शायद यह समझ लिया था कि सत्ता में रहते हुए कानून की पहुंच केवल उत्तराखंड तक सीमित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश एक कानून और एक संविधान से चलता है और कानून की कार्रवाई किसी एक राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रहती।

गोदियाल ने कहा कि अभी कर्नाटक से कानून की कार्रवाई सामने आई है और आगे देश के दूसरे हिस्सों से भी कानून की प्रक्रिया उनके दरवाजे तक पहुंच सकती है।

भाजपा के सामने रखे तीन विकल्प

गणेश गोदियाल ने भाजपा के सामने तीन विकल्प रखते हुए कहा कि पार्टी को इस पूरे विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा को माफी मांगनी चाहिए, कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और राहुल गांधी के खिलाफ कथित साजिश के तहत दर्ज की गई एफआईआर को वापस लेना चाहिए।

गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर नहीं देख रही, बल्कि इसे पहले हुई कार्रवाई की प्रतिक्रिया मानती है।

“छह महीने बाद बदल सकता है वक्त”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा को राजनीतिक चेतावनी देते हुए कहा कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि छह महीने बाद उत्तराखंड में भी परिस्थितियां बदल सकती हैं और सत्ता परिवर्तन के साथ कानून की कार्रवाई का स्वरूप भी बदल सकता है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार के रहते कांग्रेस की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई, उसे कांग्रेस द्वेष की कार्रवाई मानती है।

क्या है हल्द्वानी का पूरा विवाद?

दरअसल, 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली आयोजित हुई थी। इसके कुछ दिन बाद 11 अगस्त को कुछ लोगों की ओर से उसी मैदान और मंच पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाने का मामला सामने आया।

कांग्रेस ने इस धार्मिक अनुष्ठान को मंच पर दलित नेता की मौजूदगी के बाद किया गया कथित “शुद्धिकरण” बताया। इसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किए और भाजपा तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

भाजपा ने कथित शुद्धिकरण को बताया था उचित

विवाद के बीच उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मीडिया से बातचीत में कथित शुद्धिकरण की कार्रवाई का समर्थन किया था। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी होती रही है।

अब कर्नाटक में भाजपा नेताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

कांग्रेस-भाजपा के बीच बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड की राजनीति से आगे दूसरे राज्य में दर्ज एफआईआर तक पहुंच गया है। कांग्रेस इसे कार्रवाई की प्रतिक्रिया बता रही है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आगे कानूनी प्रक्रिया क्या दिशा लेती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

आने वाले महीनों में यह मुद्दा कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बन सकता है।

निष्कर्ष

हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए माफी, दोषियों पर कार्रवाई और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है। “कानून के हाथ लंबे होते हैं” वाले बयान के जरिए गोदियाल ने भाजपा को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई आगे किस दिशा में बढ़ती है और भाजपा की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

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