स्थान: हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड
दिनांक: 6 सितंबर 2026
हल्द्वानी में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चलाए जा रहे अभियान के बीच दूध के नमूनों की जांच में बड़ी खामी सामने आई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अलग-अलग कंपनियों के दूध के लिए गए नमूनों में मिल्क फैट और सॉलिड नॉट फैट यानी एसएनएफ की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई है। राज्य खाद्य प्रयोगशाला, रुद्रपुर से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित नमूनों को सबस्टैंडर्ड यानी अधोमानक घोषित किया गया है।
यह कार्रवाई नैनीताल के जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम की ओर से की गई थी। विभाग ने 5 अगस्त 2026 को हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों के वितरकों से दूध के नमूने एकत्र किए थे। इसके बाद सभी नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला रुद्रपुर भेजा गया।
पांच नमूनों में सामने आई गुणवत्ता की कमी
प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार परम स्टैंडर्ड मिल्क, मधुसूदन काऊ मिल्क, हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क, मदर डेयरी काऊ मिल्क और खुले गाय-भैंस के मिश्रित दूध के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच में मुख्य रूप से दूध में मौजूद मिल्क फैट और एसएनएफ की मात्रा कम पाई गई। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसी आधार पर इन नमूनों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अधोमानक घोषित किया है।
परम स्टैंडर्ड मिल्क में फैट मानक से कम
जांच रिपोर्ट के मुताबिक परम स्टैंडर्ड मिल्क के नमूने में मिल्क फैट 3.75 प्रतिशत पाया गया। निर्धारित न्यूनतम मानक 4.5 प्रतिशत है। इस तरह नमूने में फैट की मात्रा तय मानक से कम मिली।
इसी तरह मधुसूदन काऊ मिल्क के नमूने में मिल्क फैट 3.11 प्रतिशत और एसएनएफ 8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके लिए निर्धारित मानक क्रमशः 3.2 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत हैं।
हेल्थवेज और मदर डेयरी के नमूने भी मानकों से नीचे
हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क के नमूने की जांच में मिल्क फैट 4.27 प्रतिशत और एसएनएफ 7.21 प्रतिशत पाया गया। जबकि निर्धारित मानक 4.5 प्रतिशत फैट और 8.5 प्रतिशत एसएनएफ का है।
वहीं मदर डेयरी काऊ मिल्क के नमूने में मिल्क फैट 3.04 प्रतिशत मिला। इसके लिए निर्धारित न्यूनतम मानक 3.2 प्रतिशत है। यानी इस नमूने में भी फैट की मात्रा निर्धारित सीमा से कम पाई गई।
खुले मिश्रित दूध में भी कम मिला फैट और एसएनएफ
जांच के दौरान गाय और भैंस के खुले मिश्रित दूध का नमूना भी लिया गया था। इसमें मिल्क फैट महज 2.96 प्रतिशत और एसएनएफ 6.59 प्रतिशत पाया गया।
रिपोर्ट में निर्धारित मानकों से कम मात्रा सामने आने के बाद इस नमूने को भी अधोमानक की श्रेणी में रखा गया है।
मिलावट की कई जांचों में नहीं मिला कृत्रिम पदार्थ
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि प्रयोगशाला जांच के दौरान इन नमूनों में स्टार्च, यूरिया, नमक, न्यूट्रलाइजर, शुगर और कृत्रिम सिंथेटिक रंग की मिलावट नहीं मिली।
हालांकि इन पदार्थों की मौजूदगी नहीं पाए जाने के बावजूद दूध में मिल्क फैट और कुछ मामलों में एसएनएफ निर्धारित मानकों से कम होने के कारण नमूनों को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं माना गया।
संबंधित कारोबारियों पर होगी कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी एएस रावत के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उन्होंने आम लोगों से भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो इसकी जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जा सकती है।
विभाग की कार्रवाई से कारोबारियों में हड़कंप
दूध के नमूनों की जांच में सामने आई कमियों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने आगे की कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और नमूना जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
निष्कर्ष
हल्द्वानी में दूध के पांच नमूनों का निर्धारित मानकों पर खरा न उतरना खाद्य गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि जांच में स्टार्च, यूरिया और कृत्रिम रंग समेत कई मिलावटकारी पदार्थों की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मिल्क फैट और एसएनएफ की कमी के कारण नमूनों को अधोमानक घोषित किया गया है। अब संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। वहीं विभाग ने उपभोक्ताओं से भी दूध और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता के प्रति सजग रहने की अपील की है।


