देहरादून, 13 सितंबर 2026
पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर रविवार को देहरादून में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन (एनएमओपीएस) उत्तराखंड के बैनर तले प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कर्मचारी परेड ग्राउंड में जुटे। बारिश के बावजूद कर्मचारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। जनसभा के बाद कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने हाथीबड़कला के पास बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया।
परेड ग्राउंड से शुरू हुआ प्रदर्शन
रविवार सुबह से ही प्रदेशभर से कर्मचारी पुरानी पेंशन की मांग को लेकर परेड ग्राउंड पहुंचने लगे। यहां कर्मचारी नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रदर्शन में डटे रहे। सभा समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर रवाना हुए। कर्मचारियों के आगे बढ़ने पर पुलिस ने हाथीबड़कला के पास बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया।
बैरिकेडिंग पर चढ़े कर्मचारी, जमकर की नारेबाजी
मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोके जाने पर कुछ प्रदर्शनकारी कर्मचारियों में नाराजगी दिखाई दी। कुछ कर्मचारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और वहीं से अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग दोहराई।
पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद कर्मचारियों ने बैरिकेडिंग के पास ही धरना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर काफी देर तक नारेबाजी और विरोध का दौर चलता रहा।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। संगठन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के को-ऑर्डिनेटर भुवन रावत को ज्ञापन देकर पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर सरकार से ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया।
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल एक मांग को लेकर है और जब तक पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं की जाती, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
1 अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन देने की मांग
संगठन के प्रांतीय महामंत्री मुकेश रतूड़ी ने कहा कि कर्मचारियों की एकसूत्रीय मांग है कि 1 अक्टूबर 2005 के बाद उत्तराखंड में नियुक्त कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से इस मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांग पर अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की अपील करते हुए कहा कि कर्मचारी अपनी मांग से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मुकेश रतूड़ी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले समय में आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
नई और यूनिफाइड पेंशन योजना पर उठाए सवाल
कर्मचारी नेताओं ने नई पेंशन योजना के साथ वर्तमान में लागू यूनिफाइड पेंशन योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना को 1 जनवरी 2004 से लागू किया, जबकि उत्तराखंड में इसे 1 अक्टूबर 2005 से लागू किया गया।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि नई पेंशन व्यवस्था और यूनिफाइड पेंशन योजना बाजार आधारित होने के कारण कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति के बाद के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। उनका कहना है कि इसका वास्तविक प्रभाव कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय देखने को मिलेगा।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने का ऐलान
पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कर्मचारियों ने सरकार को संकेत दिया है कि आने वाले समय में आंदोलन और व्यापक किया जा सकता है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि प्रदेशभर के अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसलिए सरकार को कर्मचारियों की मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।
निष्कर्ष
देहरादून में बारिश के बीच कर्मचारियों का मुख्यमंत्री आवास कूच यह बताता है कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा अभी भी कर्मचारियों के बीच प्रमुख बना हुआ है। परेड ग्राउंड से शुरू हुआ प्रदर्शन हाथीबड़कला में पुलिस बैरिकेडिंग पर जाकर रुका, लेकिन कर्मचारियों ने वहीं से अपनी आवाज बुलंद की। अब कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है और मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन ने आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाने के संकेत दिए हैं।


