दिनांक: 17 सितंबर 2026
स्थान: देहरादून
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उत्तराखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने अग्निपथ योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए अग्निवीरों के भविष्य पर सवाल उठाए हैं। देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने पत्रकार वार्ता कर योजना को समाप्त करने और सेना में पहले की तरह स्थायी भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग रखी।
उत्तराखंड के युवाओं पर अग्निवीर योजना के असर का मुद्दा उठाया
कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सैन्य परंपरा बेहद पुरानी और गौरवशाली रही है। पर्वतीय जिलों के हजारों परिवार पीढ़ियों से सेना में रोजगार को अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते आए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के सामने स्थायी नौकरी की उम्मीद रहती है, जबकि अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की सेवा के बाद बड़ी संख्या में युवाओं को सेना से बाहर आना पड़ता है। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद लौटने वाले अग्निवीरों के रोजगार और भविष्य के लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई है।
हरक सिंह रावत बोले- उत्तराखंड में सेना से जुड़े हैं बड़ी संख्या में परिवार
डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड को सैन्य परंपरा वाला प्रदेश माना जाता है और यहां बड़ी संख्या में परिवार सेना से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वीर सैनिकों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान दिया है।
उन्होंने अग्निपथ योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि चार वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर चुनौती खड़ी होती है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से पुरानी व्यवस्था के तहत स्थायी सैन्य भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की मांग की।
कांग्रेस ने योजना को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल उठाए
कांग्रेस नेताओं ने अग्निपथ योजना को लेकर अपने राजनीतिक विरोध को दोहराते हुए कहा कि युवाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि अल्पकालिक सैन्य सेवा व्यवस्था से युवाओं के भविष्य और सेना की क्षमता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस ने कहा कि देश के युवाओं में सेना में जाने और देश सेवा करने की इच्छा रही है, ऐसे में सरकार को चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के भविष्य को लेकर स्पष्ट और ठोस नीति सामने रखनी चाहिए। पार्टी ने अग्निवीरों को नियमित किए जाने की मांग भी दोहराई।
पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने के कार्यक्रम पर भी निशाना
पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने के अभियान को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि महंगाई के दौर में गरीब और जरूरतमंद परिवारों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती है, उनके लिए सहायता और राहत प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीप जलाने की अपील को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए।
भाजपा ने शुरू किया है ‘सेवा संकल्प अभियान’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से उत्तराखंड में भाजपा की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाना है। इसके तहत सेवा, जनभागीदारी और विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
इसी अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए लोगों से दीप जलाने की अपील की गई है। कांग्रेस ने इसी कार्यक्रम को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
कांग्रेस की मांग- अग्निवीरों के भविष्य पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से अग्निवीरों के भविष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद जो युवा सेना से बाहर आएंगे, उनके रोजगार और पुनर्वास के लिए सरकार की क्या योजना है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
पार्टी ने अग्निपथ योजना को समाप्त कर पहले की तरह स्थायी सैन्य भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग भी दोहराई है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उत्तराखंड में जहां भाजपा की ओर से सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने इसी मौके पर अग्निवीर योजना और दीप जलाने के अभियान को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। कांग्रेस ने विशेष रूप से उत्तराखंड के युवाओं के सैन्य रोजगार से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए अग्निपथ योजना की समीक्षा और स्थायी भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग रखी है। अब अग्निवीरों के भविष्य और चार वर्ष की सेवा के बाद रोजगार की व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से दी जाने वाली जानकारी इस राजनीतिक बहस का अगला महत्वपूर्ण पक्ष होगी।



