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हरिपुर को मिली नई पहचान: सीएम धामी ने किया भव्य यमुना घाट का लोकार्पण, 25 फीट ऊंची यमुना प्रतिमा का भी अनावरण

दिनांक: 17 सितंबर 2026
स्थान: विकासनगर, देहरादून

देहरादून जिले के कालसी क्षेत्र में स्थित हरिपुर को धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विकासनगर दौरे के दौरान हरिपुर में नवनिर्मित भव्य यमुना घाट का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने घाट परिसर में स्थापित 25 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा का भी अनावरण किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव के पुनर्जागरण का कार्य लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। हरिपुर में तैयार किया गया यह घाट धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को भी नई दिशा देने का काम करेगा।

जौनसार-बावर का प्रवेश द्वार है हरिपुर

कालसी का हरिपुर क्षेत्र जौनसार-बावर का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां यमुना और टौंस समेत कई सहायक नदियों का संगम क्षेत्र भी मौजूद है। टौंस को तमसा के नाम से भी जाना जाता है। यमुना और टौंस नदियों के बीच बसा जौनसार-बावर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, विशिष्ट लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली के लिए जाना जाता है।

यमुना नदी का उद्गम यमुनोत्री से होता है और अपने लंबे सफर के दौरान यह हरिपुर से होकर आगे बढ़ती है। इसी वजह से हरिपुर का धार्मिक महत्व स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष है।

श्रद्धालुओं के लिए तैयार हुआ भव्य यमुना घाट

यमुनोत्री से निकलने वाली यमुना नदी को हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। इसके बावजूद प्रदेश में अब तक ऐसा कोई प्रमुख और व्यवस्थित घाट नहीं था, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ स्नान और धार्मिक अनुष्ठान कर सकें।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हरिपुर में भव्य यमुना घाट का निर्माण कराया गया है। घाट तैयार होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि नए घाट के विकसित होने से धार्मिक यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

हरिपुर घाट को केवल धार्मिक स्थल के तौर पर ही नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इससे जौनसार-बावर में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। घाट के विकसित होने से आसपास के क्षेत्रों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर स्थानीय कारोबार पर पड़ेगा।

स्थानीय दुकानदारों, छोटे व्यापारियों, परिवहन से जुड़े लोगों और अन्य सेवा क्षेत्र के लोगों के लिए भी इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। घाट के विकास को क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ऐतिहासिक विरासत से भी समृद्ध है हरिपुर-कालसी

हरिपुर और कालसी क्षेत्र धार्मिक महत्व के साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी काफी समृद्ध है। यहां सम्राट अशोक के शिलालेख मौजूद हैं, जो क्षेत्र की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं।

इसके अलावा गुरु गोबिंद सिंह के बाल्यकाल से जुड़े प्रसंग और प्राचीन अश्वमेघ यज्ञ स्थल से संबंधित मान्यताएं भी इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं। इन ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की जाती है।

अनूठी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है जौनसार-बावर

देहरादून जिले का जौनसार-बावर अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। यहां महासू महाराज को आराध्य देव के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है और हनोल स्थित महासू मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक पहचान है।

क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, बागवानी और पशुपालन पर निर्भर है। यहां मनाए जाने वाले पारंपरिक त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में जौनसारी संस्कृति की विशिष्ट झलक देखने को मिलती है।

किसान यहां कोदो, झंगोरा, मक्का, जौ, गेहूं और धान सहित विभिन्न पारंपरिक फसलों और मोटे अनाजों का उत्पादन करते हैं। इसके साथ ही अदरक, टमाटर, अरबी, हरा धनिया, हरी मिर्च, बीन, शिमला मिर्च और लहसुन जैसी नगदी फसलों का भी उत्पादन किया जाता है।

सेब, नाशपाती और कीवी की भी होती है पैदावार

जौनसार-बावर के ऊंचाई वाले इलाकों में बागवानी भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां किसान सेब, पूलम, नाशपाती और कीवी जैसे फलों का उत्पादन करते हैं।

क्षेत्र के किसानों के लिए सहिया स्थित सब्जी मंडी प्रमुख बाजारों में शामिल है। इन दिनों मंडी में अदरक की आवक भी शुरू हो गई है। यहां से उत्पादित अदरक की मांग दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित दूसरे क्षेत्रों में भी रहती है।

इसके अलावा क्षेत्र के ग्रामीण भैंस, गाय, बैल, बकरी और भेड़ पालन के जरिए भी अपनी आजीविका चलाते हैं।

देव डोलियों के स्नान से जुड़ी है घाट की आस्था

हरिपुर का यमुना तट स्थानीय धार्मिक परंपराओं में भी विशेष स्थान रखता है। जौनसार-बावर क्षेत्र की देव डोलियों को मां यमुना के स्नान के लिए हरिपुर लाने की परंपरा रही है। श्रद्धालु यहां यमुना में स्नान कर धार्मिक पुण्य प्राप्त करने की आस्था रखते हैं।

अब घाट का भव्य निर्माण होने के बाद इन धार्मिक गतिविधियों के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध होगी। इससे स्थानीय धार्मिक आयोजनों को भी सुविधाजनक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

श्रद्धालुओं की बढ़ेगी आवाजाही, रोजगार की भी उम्मीद

हरिपुर में यमुना घाट के निर्माण को क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। घाट के लोकार्पण और मां यमुना की विशाल प्रतिमा स्थापित होने से हरिपुर की धार्मिक पहचान और मजबूत हुई है।

आने वाले समय में यदि यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ती है तो इसका लाभ स्थानीय बाजार, परिवहन, होटल, होम स्टे और अन्य छोटे व्यवसायों को मिल सकता है। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।

निष्कर्ष

हरिपुर में भव्य यमुना घाट का लोकार्पण और 25 फीट ऊंची मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण जौनसार-बावर के धार्मिक और पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। ऐतिहासिक विरासत, समृद्ध लोक संस्कृति और प्राकृतिक खूबसूरती से घिरे हरिपुर को अब एक व्यवस्थित धार्मिक स्थल के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। घाट के विकसित होने से जहां श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी, वहीं पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार को भी गति मिलने की संभावना है।

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