दिनांक: 17 सितंबर 2026
स्थान: ऋषिकेश/किच्छा, ऊधम सिंह नगर
नौकरी के नाम पर पंपलेट बांटकर युवाओं को झांसे में लेने का मामला सामने आया है। एम्स के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने भाई-बहन समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से नौकरी के बदले रकम वसूल रहे थे। मामले में दो फर्जी नियुक्ति पत्र और दो लाख रुपये नकद बरामद किए जाने का दावा किया गया है।
परिसर में पंपलेट बांटते दिखा संदिग्ध व्यक्ति
एम्स प्रशासन के अनुसार, कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि किच्छा स्थित निर्माणाधीन सेटेलाइट सेंटर में भर्ती के नाम पर फर्जी पंपलेट बांटे जा रहे हैं। सूचना मिलने के बाद एम्स के सुरक्षा कर्मियों को सतर्क किया गया और परिसर में इस तरह की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल अधिकारियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए।
बीते मंगलवार को सुरक्षा कर्मियों की नजर परिसर में पंपलेट बांट रहे एक व्यक्ति पर पड़ी। एम्स इंटेलीजेंस के एक कर्मचारी ने मामले की तह तक जाने के लिए उक्त व्यक्ति से संपर्क किया और किच्छा में नौकरी करने की इच्छा जताई।
बताया गया कि इसके बाद आरोपी ने कर्मचारी को एम्स के गेट नंबर दो के बाहर बुलाया।
बैराज रोड पर कार में चल रहा था लेन-देन
एम्स इंटेलीजेंस कर्मचारी जब बताए गए स्थान पर पहुंचा तो बैराज रोड पर कुछ लोग एक कार में बैठे मिले। आरोप है कि यहां नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम के लेन-देन की प्रक्रिया चल रही थी।
मामले की जानकारी मिलने पर सुरक्षा कर्मियों ने मौके पर मौजूद तीन लोगों को घेरकर पूछताछ की। इसके बाद कार की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान नर्सिंग ऑफिसर और एमटीएस पद के दो फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने का दावा किया गया। इसके अलावा कार से दो लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।
एम्स प्रशासन का कहना है कि बरामद नियुक्ति पत्रों का इस्तेमाल युवाओं को नौकरी का भरोसा दिलाकर उनसे रकम लेने के लिए किया जा रहा था।
एम्स के आउटसोर्स कर्मचारी पर भी आरोप
इस मामले में बुधवार शाम एम्स के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर सुब्रत बछाऊ, दीपना मंडल, दीपांशु मंडल निवासी ऊधम सिंह नगर, गणेश निवासी नानकमत्ता, ऊधम सिंह नगर और एम्स में आउटसोर्स कर्मचारी दीपक गुसाईं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभी आरोपी नौकरी लगवाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लेन-देन कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, दीपक गुसाईं के कब्जे से दो लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
एम्स प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि दीपक गुसाईं आयुष्मान योजना के तहत आउटसोर्स माध्यम से एम्स में कार्यरत है।
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी, जांच शुरू
प्रकरण सामने आने के बाद पुलिस ने एम्स प्रशासन की शिकायत के आधार पर नामजद पांचों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नौकरी के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया था और इस कथित फर्जीवाड़े में कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि एम्स प्रशासन की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
निष्कर्ष
एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र और पंपलेट के जरिए युवाओं को कथित तौर पर ठगने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों सतर्क हो गए हैं। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे प्रकरण में कितने लोग शामिल थे और नौकरी के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से रकम ली गई।


