स्थान: सजनपुर पीली, हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 8 अक्टूबर 2026
हरिद्वार के श्यामपुर थाना क्षेत्र में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की मौत हो गई। सजनपुर पीली गांव में खेत में काम कर रहे ग्रामीण पर अचानक हाथी ने हमला कर दिया। हाथी ने ग्रामीण को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
खेत में काम करते समय हुआ अचानक हमला
जानकारी के अनुसार सजनपुर पीली गांव में ग्रामीण खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान क्षेत्र में घूम रहा हाथी अचानक खेत में पहुंच गया और ग्रामीण पर हमला कर दिया। ग्रामीण को संभलने या बचने का मौका नहीं मिल सका।
हाथी के हमले की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। तब तक ग्रामीण की मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी फैलते ही गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जताया आक्रोश
हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि सजनपुर पीली और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों के लगातार खेतों और आबादी के आसपास आने से लोगों में पहले से ही डर का माहौल है। खासकर खेतों में काम करने वाले किसानों को हर समय जंगली हाथियों के हमले का खतरा बना रहता है।
हाथियों की आवाजाही रोकने की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ घटना के बाद मौके पर कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे हाथी आबादी और खेतों तक न पहुंच सकें।
ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया है और प्रशासन को पीड़ित परिवार की मदद के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
गांव में बना हुआ है डर का माहौल
हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत के बाद सजनपुर पीली गांव में दहशत और गुस्सा दोनों दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
निष्कर्ष
सजनपुर पीली में हाथी के हमले से हुई ग्रामीण की मौत ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की निगरानी बढ़ाने, आबादी और खेतों की ओर उनकी आवाजाही रोकने तथा मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है। अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।


