BREAKING

अंकिता भंडारी हत्याकांड पर फिर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस, विनोद चमोली बोले- परिवार की भावनाओं का न हो राजनीतिक इस्तेमाल

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 16 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और उससे जुड़े सवालों को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा विधायक एवं पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कांग्रेस पर अंकिता के माता-पिता की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार की जांच प्रक्रिया और कथित वीआईपी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

‘अंकिता पूरे उत्तराखंड की बेटी थी’, विनोद चमोली ने कांग्रेस को घेरा

भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा कि अंकिता भंडारी का मामला बेहद संवेदनशील है और इससे पूरे उत्तराखंड के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल को पीड़ित परिवार के दुख को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

चमोली के मुताबिक, अंकिता किसी एक पार्टी की बेटी नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बेटी थी। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार का दुख और उनकी पीड़ा अपनी जगह है, जिसे पूरा प्रदेश महसूस करता है। भाजपा भी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मामले में जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की अपील की। उनका कहना है कि राजनीति करने के बजाय पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

तीन दोषियों को उम्रकैद, सीबीआई जांच के नतीजों का इंतजार

विनोद चमोली ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्य तीन आरोपियों को अदालत उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। उन्होंने इसे मामले में हुई कानूनी कार्रवाई और अभियोजन की पैरवी से जोड़ते हुए कहा कि अब सीबीआई जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जाना चाहिए।

भाजपा विधायक ने भरोसा जताया कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि न्याय की प्रक्रिया में कोई कानूनी या प्रक्रियागत बाधा आती है, तो उसे दूर किया जाना चाहिए।

चमोली का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। हालांकि, कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवाल इस मामले में राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बने हुए हैं।

कांग्रेस का पलटवार, सरकार से मांगे सवालों के जवाब

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में सरकार को जनता के सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने जांच की प्रक्रिया और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर एक बार फिर सरकार को घेरा है।

गरिमा दसौनी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद करीब तीन साल तक राज्य और केंद्र सरकार की ओर से सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की गई, जबकि प्रदेश में लगातार न्याय की मांग उठती रही।

उन्होंने राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन इस संबंध में उठने वाले सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आने चाहिए।

कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका सार्वजनिक करने की मांग

गरिमा दसौनी ने कहा कि सीबीआई जांच में इस बात की स्पष्टता जरूरी है कि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका क्या थी और उससे जुड़े सवालों का जवाब क्या है।

उन्होंने कथित वीआईपी को संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले ऐसी नियुक्ति संदेह पैदा करती है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इस कदम से संबंधित व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश हो सकती है।

हालांकि, कथित वीआईपी की भूमिका और नियुक्ति को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है। इस मामले में सभी संबंधित तथ्यों और दावों को स्पष्ट रूप से सामने लाना महत्वपूर्ण है।

अंकिता को न्याय दिलाने की मांग के बीच सियासी बयानबाजी तेज

अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड में लंबे समय से न्याय, जांच की पारदर्शिता और कथित वीआईपी की भूमिका जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में है। अब भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

जहां भाजपा कांग्रेस पर पीड़ित परिवार की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस सरकार से जांच से जुड़े सवालों के जवाब और कथित वीआईपी की भूमिका पर स्पष्टता मांग रही है।

निष्कर्ष: अंकिता भंडारी मामले में राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबसे अहम सवाल न्याय और जांच की पारदर्शिता का है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि जांच से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट रूप से सामने लाया जाए और आरोपों पर निष्कर्ष प्रमाणों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाले जाएं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *