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93 दिन से लापता बीएससी छात्र का किमाड़ी के जंगल में मिला कंकाल, कपड़ों से हुई पहचान; परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

दिनांक: 19 अक्टूबर 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

देहरादून में करीब तीन महीने से लापता 22 वर्षीय छात्र की तलाश का मामला अब एक दर्दनाक मोड़ पर पहुंच गया है। 93 दिनों से लापता मोहम्मद शारिक का कंकाल किमाड़ी के जंगल में बरामद हुआ है। जंगल में करीब सात किलोमीटर अंदर मिले अवशेषों की पहचान परिजनों ने कपड़ों के आधार पर की। छात्र की मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार में शोक का माहौल है। वहीं, परिजनों ने उसके साथ रहने वाले दो युवकों पर हत्या का संदेह जताते हुए मामले की गहन जांच की मांग की है। पुलिस अब मौत की परिस्थितियों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

17 जुलाई की रात स्कूटी लेकर निकला था शारिक

मोहम्मद शारिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के शेरकोट का निवासी था। वह देहरादून की आजाद कॉलोनी में किराये के कमरे में रहकर एक निजी विश्वविद्यालय से रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई कर रहा था। वह बीएससी अंतिम वर्ष का छात्र था।

परिजनों के मुताबिक, 17 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे शारिक अपनी स्कूटी लेकर कमरे से निकला था। बताया जाता है कि उसने कमरे में मौजूद एक व्यक्ति से करीब आधे घंटे में वापस आने की बात कही थी। लेकिन रात बीतने के बाद भी वह नहीं लौटा।

शुरुआत में परिजनों और उसके साथ रहने वाले युवकों ने अपने स्तर पर उसकी तलाश की। जब उसका कहीं पता नहीं चला और मोबाइल फोन भी बंद आने लगा, तो परिवार की चिंता बढ़ गई।

पिता ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी

शारिक के लापता होने के अगले दिन, 18 जुलाई को उसके पिता मोहम्मद तारिक ने पटेल नगर कोतवाली में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने युवक की तलाश शुरू की, लेकिन कई दिनों तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।

लंबे समय तक सुराग नहीं मिलने के बाद पुलिस ने मामले में अपहरण से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। इसके बावजूद छात्र का पता नहीं चल सका और परिवार लगातार उसकी तलाश में जुटा रहा।

ड्रोन से तलाश के दौरान जंगल में मिले अवशेष

करीब 93 दिनों से लापता छात्र की तलाश के दौरान पुलिस ने ड्रोन की मदद भी ली। इसी अभियान के दौरान किमाड़ी क्षेत्र में जंगल के भीतर, मुख्य स्थान से लगभग सात किलोमीटर अंदर कंकाल बरामद हुआ।

अवशेष मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। परिजनों ने वहां मिले कपड़ों के आधार पर कंकाल की पहचान मोहम्मद शारिक के रूप में की। हालांकि, युवक की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता लगाने के लिए आगे की जांच आवश्यक है।

कंकाल मिलने से लंबे समय से अनसुलझे इस मामले में नया मोड़ आ गया है। अब पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि शारिक जंगल तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन हालात में हुई।

साथ रहने वाले दो युवकों पर परिजनों ने जताया शक

छात्र की मौत की आशंका के बीच परिजनों ने उसके साथ रहने वाले दो युवकों पर हत्या में शामिल होने का संदेह जताया है। परिवार ने पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके।

हालांकि, फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी किसी व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है। जांच एजेंसियां घटना से जुड़े सभी तथ्यों और संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस का क्या कहना है?

पटेल नगर कोतवाली प्रभारी नरेश राठौर के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है। पुलिस छात्र की मौत की परिस्थितियों का पता लगाने और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को जुटाने में लगी है।

कंकाल मिलने के बाद जांच में बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों, छात्र के लापता होने की परिस्थितियों और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

निष्कर्ष

देहरादून में 93 दिनों से लापता छात्र मोहम्मद शारिक का कंकाल मिलने से परिवार की तलाश का अंत बेहद दुखद स्थिति में हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्र की मौत कैसे हुई और वह किमाड़ी के दुर्गम जंगल तक किन परिस्थितियों में पहुंचा। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है, लेकिन मामले में किसी की भूमिका अभी आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

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