देहरादून | 18 अप्रैल 2026
उत्तराखंड में प्रशासनिक लापरवाही पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सख्त नजर आए। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा बैठक के दौरान जब यह खुलासा हुआ कि अफसरों ने 22,246 शिकायतें जबरन बंद कर दीं, तो मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
बिना अनुमति शिकायत बंद करने पर रोक
सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में सीएम धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के बिना किसी भी शिकायत को बंद नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन 1905 केवल एक नंबर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और उम्मीदों का माध्यम है। इसलिए हर शिकायत का समाधान शिकायतकर्ता की संतुष्टि तक किया जाना जरूरी है।
18% से ज्यादा शिकायतें जबरन बंद
राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 (करीब 18.68%) शिकायतों को अनुचित तरीके से बंद कर दिया गया। यह आंकड़ा सामने आते ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
बताया गया कि कई विभाग गंभीर शिकायतों को दूसरी श्रेणियों में डालकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।
विभागों में लापरवाही के उदाहरण
- जल संस्थान ने पानी न आने की 861 शिकायतें जबरन बंद कर दीं
- गैस सिलेंडर रिफिल और राशन कार्ड की मांग को शिकायत मानने के बजाय ‘डिमांड’ में डाल दिया गया
- बिजली बिल और खराब मीटर की समस्याओं को तकनीकी कारणों में उलझाया गया
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के पास 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से 2,043 (98.5%) बिना ठोस समाधान के बंद कर दी गईं।
लंबित शिकायतों का बढ़ता बोझ
राज्य में 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें:
- राजस्व विभाग – 472
- वन विभाग – 445
- लोक निर्माण विभाग – 401
कुछ मामलों में शिकायतें वर्ष 2021 से ही लंबित हैं, जो प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है।
जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% और प्रक्रिया में चल रही शिकायतों में 2290% की वृद्धि दर्ज की गई है।
अच्छे काम करने वालों की सराहना
सीएम धामी ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की सराहना भी की। इनमें उत्तरकाशी में यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं (99.09%), पौड़ी में अभिनव रावत (98.34%), ऋषिकेश के पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली (98.30%), विकासनगर के एडीओ दीपक थापली (98.23%) और पटेलनगर के एसएचओ विनोद गुसाईं (97.41%) शामिल हैं।
निष्कर्ष
सीएम धामी की सख्ती से साफ संकेत मिला है कि जनता की शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, अन्यथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।


