देहरादून | 12 मई 2026
उत्तराखंड के चर्चित रामशंकर हत्याकांड मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच करेगी। नैनीताल हाईकोर्ट ने खानपुर में वर्ष 2024 में हुए प्रॉपर्टी डीलर रामशंकर हत्याकांड की जांच स्थानीय पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद देहरादून स्थित सीबीआई शाखा में 6 मई को मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
यह मामला डोईवाला निवासी प्रॉपर्टी डीलर रामशंकर की संदिग्ध हत्या से जुड़ा हुआ है। मृतक की पत्नी चंद्रलेखा ने खानपुर कोतवाली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने पूरे मामले की जांच में गंभीर लापरवाही बरती और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया।
याचिकाकर्ता चंद्रलेखा, निवासी कुड़कावाला डोईवाला, ने बताया कि उनके ससुर रमेश चंद्र ने 8 दिसंबर 2024 को खानपुर कोतवाली में अपने बेटे रामशंकर के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 13 दिसंबर 2024 को आरोपी राबिन की निशानदेही पर रामशंकर का शव बरामद किया था।
इसके बाद खानपुर पुलिस ने राबिन, अक्षय और अंकित निवासी चंदपुरी खादर, खानपुर, हरिद्वार के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि मृतक के परिवार ने शुरू से ही पुलिस जांच पर सवाल उठाए और कई अहम तथ्यों को दबाने का आरोप लगाया।
चंद्रलेखा का आरोप है कि हत्या में इस्तेमाल की गई कार की न तो फॉरेंसिक जांच करवाई गई और न ही कार के पहले मालिक अनिल कुमार तथा दूसरे मालिक सोनू फौजी से गंभीर पूछताछ की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जल्दबाजी में जांच पूरी दिखाते हुए तय समय से पहले ही अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर पुलिस की कार्रवाई को सही नहीं माना जा सकता कि एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जबकि बिना रिपोर्ट के ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई और मुकदमे की सुनवाई शुरू हो गई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि स्थानीय पुलिस की जांच में चूक या लापरवाही हुई है, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत को मामले की आगे की जांच सीबीआई को सौंपने का अधिकार है। इसी आधार पर कोर्ट ने पूरे मामले की आगे की जांच तत्काल प्रभाव से सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए।
अदालत ने स्थानीय जांच एजेंसी को निर्देशित किया है कि जांच से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य, केस डायरी और दाखिल आरोपपत्र समेत पूरा रिकॉर्ड तत्काल सीबीआई को सौंपा जाए, ताकि निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित की जा सके।
निष्कर्ष
रामशंकर हत्याकांड में सीबीआई जांच के आदेश के बाद अब मामले में नए खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक परिवार को उम्मीद है कि सीबीआई जांच से हत्या के पीछे की पूरी साजिश और सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आएगी। वहीं प्रदेश में यह मामला अब कानून व्यवस्था और पुलिस जांच प्रणाली को लेकर भी बड़ी बहस का विषय बन गया है।


