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आदि कैलाश यात्रा के दौरान इंदौर के 27 वर्षीय तिलक शर्मा की मौत, उज्जैन महाकाल के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट और श्रृंगार सामग्री

स्थान: धारचूला, पिथौरागढ़, उत्तराखंड
तारीख: 30 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के एक युवक की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक की पहचान इंदौर निवासी 27 वर्षीय तिलक शर्मा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि आदि कैलाश से लौटते समय उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी थी। साथियों ने ऑक्सीजन देने के साथ उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।

इस घटना से यात्रा पर उनके साथ आए दोस्तों में शोक की लहर है। तिलक की मौत की खबर से इंदौर स्थित उनके परिवार में भी मातम पसरा हुआ है।

सात दोस्तों के साथ आदि कैलाश यात्रा पर आए थे तिलक

जानकारी के अनुसार, तिलक शर्मा पुत्र मनोज शर्मा, निवासी 24 शटर गली, नगर निगम रोड के निकट, इंदौर (मध्य प्रदेश), अपने सात दोस्तों के साथ उत्तराखंड घूमने आए थे।

आदि कैलाश पहुंचने से पहले इस समूह ने नीम करोली बाबा के दर्शन किए थे। इसके बाद जागेश्वर धाम और मुक्तेश्वर की यात्रा की। नैनीताल घूमने के बाद सभी दोस्त आदि कैलाश पहुंचे थे।

दर्शन करने के बाद जब उनका दल वापस लौट रहा था, तभी अचानक तिलक की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी होने लगी और शरीर में ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई।

ऑक्सीजन देने के बाद भी नहीं बची जान

तिलक की हालत बिगड़ती देख उनके दोस्तों ने तत्काल अपने पास मौजूद ऑक्सीजन किट से उन्हें ऑक्सीजन देने की कोशिश की। हालांकि, इससे उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद साथी उन्हें वाहन से आर्मी बेस कैंप लेकर पहुंचे। बताया गया कि रात करीब आठ बजे वहां मौजूद चिकित्सकों ने उन्हें इंजेक्शन और जरूरी दवाइयां दीं। प्राथमिक उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें दूसरे बेस कैंप स्थित बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

दोस्त उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने के करीब 10 से 15 मिनट बाद ही तिलक ने दम तोड़ दिया।

इसके बाद उनका शव धारचूला लाया गया, जहां राजकीय चिकित्सालय में रखा गया है।

महाकाल मंदिर के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट और आभूषण

तिलक शर्मा केवल 27 वर्ष के थे और इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाजार में अपनी दुकान संचालित करते थे। उनका काम उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से भी जुड़ा हुआ था।

वह भगवान महाकाल के लिए विशेष रूप से चांदी के मुकुट और श्रृंगार की सामग्री तैयार करते थे। इनमें भगवान के नेत्र, कानों के आभूषण, टीका और छत्र जैसी वस्तुएं शामिल थीं।

उनके सोशल मीडिया पेज पर भी चांदी के मुकुट तैयार करने के कई वीडियो मौजूद हैं। इन वीडियो में उन्होंने बताया था कि उनके द्वारा बनाए गए मुकुट महाकाल मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाते हैं और उनके श्रृंगार में इस्तेमाल होते हैं।

अगले साल होनी थी शादी, परिवार का इकलौता बेटा था तिलक

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, तिलक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता भी उनके साथ दुकान के काम में हाथ बंटाते थे। परिवार में अगले साल होली के बाद उनकी शादी तय थी।

परिवार को तिलक की शादी की तैयारियों और नए जीवन की शुरुआत का इंतजार था, लेकिन आदि कैलाश यात्रा के दौरान हुए इस हादसे ने सारी खुशियों को मातम में बदल दिया।

एसडीएम बोले- पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि यात्री की मौत की सूचना मिली है। पुलिस की ओर से पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव अंतिम सुपुर्दगी के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

इस साल आदि कैलाश यात्रा में तीन श्रद्धालुओं की मौत

आदि कैलाश यात्रा के दौरान इस वर्ष अब तक तीन श्रद्धालुओं की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले सुधीर नाम के एक श्रद्धालु की भी यात्रा से लौटते समय धारचूला पहुंचने पर तबीयत बिगड़ गई थी। कुछ देर बाद उनकी भी मौत हो गई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण सांस संबंधी परेशानियां और हृदय संबंधी आपात स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में यात्रियों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना और आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।

कहां स्थित है आदि कैलाश?

आदि कैलाश उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील में भारत-तिब्बत सीमा के नजदीक स्थित है। इसे छोटा कैलाश और शिव कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 5,945 मीटर बताई जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आदि कैलाश को भगवान शिव का पवित्र धाम माना जाता है। इसकी आकृति तिब्बत स्थित कैलाश पर्वत से मिलती-जुलती होने के कारण श्रद्धालुओं के बीच इसका विशेष महत्व है।

यह भारत की सीमा में स्थित होने के कारण यहां यात्रा के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि यात्रियों को निर्धारित इनर लाइन परमिट और प्रशासनिक अनुमति लेनी पड़ती है।

निष्कर्ष

आदि कैलाश की धार्मिक यात्रा पर निकले तिलक शर्मा की असमय मौत ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट और श्रृंगार सामग्री तैयार करने वाले तिलक अपने परिवार और कारोबार से जुड़े सुनहरे सपने लेकर निकले थे, लेकिन यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन गई।

यह घटना ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और समय पर चिकित्सकीय सहायता की अहमियत को भी सामने लाती है।

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