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हल्द्वानी-लालकुआं हाईवे पर मौत का तांडव! तीन दिन में 5 युवाओं की मौत, आखिर कब जागेगा प्रशासन?

तीनपानी ओवरब्रिज पर तीन किशोरों की जान गई, लालकुआं के सुभाष नगर में स्कूटी-कैंटर की भिड़ंत में दो युवकों की मौत; सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर उठे सवाल

हल्द्वानी/लालकुआं, 26 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड के हल्द्वानी से लालकुआं के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रहे सड़क हादसों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते तीन दिनों के भीतर दो दर्दनाक दुर्घटनाओं में पांच लोगों की जान चली गई। पहले हल्द्वानी के तीनपानी ओवरब्रिज पर कार डिवाइडर से टकराने के कारण तीन किशोरों की मौत हुई थी, जबकि अब लालकुआं के सुभाष नगर क्षेत्र में स्कूटी और कैंटर की टक्कर में दो युवकों की जान चली गई।

लगातार हो रहे इन हादसों ने तेज रफ्तार, गलत तरीके से ओवरटेकिंग, यातायात नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच परिवारों में मातम पसरा है और स्थानीय लोग जानलेवा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

तीनपानी ओवरब्रिज पर कार हादसे में गई थी तीन किशोरों की जान

हादसों की इस कड़ी में पहली बड़ी घटना हल्द्वानी के तीनपानी ओवरब्रिज पर हुई थी। जानकारी के अनुसार, ओवरटेक करने के दौरान कार चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिसके बाद कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसे के समय कार में चार नाबालिग सवार थे।

टक्कर इतनी भीषण थी कि तीन किशोरों की मौत हो गई, जबकि एक किशोरी गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल किशोरी को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

इस घटना ने कम उम्र में वाहन चलाने, तेज रफ्तार और सड़क पर जोखिम उठाने के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया। अभी लोग इस हादसे से उबर भी नहीं पाए थे कि लालकुआं क्षेत्र में एक और जानलेवा दुर्घटना हो गई।

लालकुआं में स्कूटी और कैंटर की टक्कर, दो युवकों की मौत

दूसरा हादसा लालकुआं कोतवाली क्षेत्र के सुभाष नगर में राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर हुआ। पुलिस के अनुसार, देर रात स्कूटी और कैंटर के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में स्कूटी सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

मृतकों की पहचान चेतन बिष्ट (21 वर्ष), निवासी पश्चिमी दौलतपुर, काठगोदाम और दीक्षित बिष्ट (24 वर्ष), निवासी भवाली के रूप में हुई है।

दुर्घटना के बाद दोनों युवकों को तत्काल उपचार के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया।

पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे के कारणों को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

तीन दिन में पांच मौतें, सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल

हल्द्वानी-लालकुआं मार्ग पर कम समय में हुई इन दो दुर्घटनाओं ने सड़क पर सुरक्षित सफर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तीनपानी ओवरब्रिज पर कार दुर्घटना और लालकुआं में स्कूटी-कैंटर की टक्कर के बाद स्थानीय लोग यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत जता रहे हैं।

तेज रफ्तार, लापरवाही और गलत ओवरटेकिंग जैसे कारण कई बार जानलेवा साबित होते हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा नियमों का पालन कराने के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, यातायात नियंत्रण और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है।

हालांकि, इन दोनों दुर्घटनाओं के सटीक कारणों की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

लालकुआं बाईपास से भारी वाहनों का दबाव घटने की उम्मीद

लगातार हो रहे हादसों के बीच लालकुआं नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र लौटनी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सुभाष नगर क्षेत्र में दो युवकों की मौत बेहद दुखद घटना है। ऐसी दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को मिलकर ठोस योजना तैयार करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने लालकुआं बाईपास के निर्माण को मंजूरी दे दी है। बाईपास बनने के बाद भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा सकेगा, जिससे मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम होने और हादसों में कमी आने की उम्मीद है।

हालांकि, बाईपास के निर्माण और उसके संचालन तक मौजूदा मार्ग पर सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम करना भी जरूरी होगा।

निष्कर्ष: हादसों के बाद नहीं, पहले जरूरी हैं सुरक्षा के इंतजाम

हल्द्वानी-लालकुआं मार्ग पर तीन दिनों में पांच लोगों की मौत ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इन दुर्घटनाओं में पांच परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। अब जरूरत है कि पुलिस प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी और संबंधित विभाग दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा उपायों को मजबूत करें।

साथ ही वाहन चालकों को तेज रफ्तार और लापरवाही से बचने तथा यातायात नियमों का पालन करने की जरूरत है। स्थानीय लोगों की मांग है कि हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केवल जांच तक सीमित न रहकर प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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