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मानदेय बढ़ाने की मांग पर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, सीएम आवास कूच के दौरान पुलिस से हुई नोकझोंक

हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर रोका गया मार्च, सड़क पर धरने पर बैठीं महिलाएं; दिवाली से पहले मांगें पूरी नहीं होने पर काला दिवस मनाने की चेतावनी

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 2 नवंबर 2026

उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने और अन्य लंबित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन के नेतृत्व में प्रदेशभर से पहुंची महिलाएं पहले परेड ग्राउंड में एकत्रित हुईं और फिर जुलूस के रूप में मुख्यमंत्री आवास के लिए रवाना हुईं।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों को हाथीबड़कला में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे नाराज महिलाएं सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान मौके पर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। कार्यकर्ताओं ने सरकार पर उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज करने और वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया।


मानदेय वृद्धि को लेकर लंबे समय से आंदोलन

आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन की प्रदेश महामंत्री सुशीला खत्री ने कहा कि कार्यकर्ता लंबे समय से अपने मानदेय में बढ़ोतरी की मांग उठा रही हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से केवल आश्वासन ही दिए गए हैं। बार-बार मांग उठाने और आंदोलन करने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने का फैसला लिया गया है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार को भी प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करनी चाहिए।

2024 में बनी कमेटी, अब तक फैसले का इंतजार

सुशीला खत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन ढाई साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी कमेटी की रिपोर्ट और उसके निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

उनका कहना है कि इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए। हर बार उन्हें मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया गया, लेकिन धरातल पर कोई परिणाम सामने नहीं आया। इसी वजह से प्रदेशभर की कार्यकर्ताओं को मजबूर होकर एक बार फिर सड़कों पर उतरना पड़ा है।

दिवाली से पहले मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने साफ किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दिवाली से पहले उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दिवाली का त्योहार काला दिवस के रूप में मनाएंगी।

सरकार के फैसले का इंतजार

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर प्रदेश में मानदेय वृद्धि और लंबित मांगों का मुद्दा चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार आंदोलनरत कार्यकर्ताओं की मांगों पर कब तक कोई ठोस फैसला लेती है।

 

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