देहरादून, 15 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में सरकार नई पहल करने की तैयारी कर रही है। प्रदेश के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में अंग्रेजी के अलावा अन्य विदेशी भाषाएं पढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तार करते हुए राज्य के प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को नई भाषाएं सीखने का अवसर देना है, ताकि भविष्य में उन्हें उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर संभावनाएं मिल सकें।
अटल उत्कृष्ट और राजीव नवोदय विद्यालयों पर विशेष ध्यान
राज्य सरकार की योजना के तहत अटल उत्कृष्ट विद्यालयों और राजीव नवोदय विद्यालयों में अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। इससे स्कूली विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही विदेशी भाषाओं का ज्ञान हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में आयोजित बैठक के दौरान अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा प्रशिक्षण को केवल भाषा सिखाने तक सीमित न रखते हुए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
योजना का दायरा स्कूली विद्यार्थियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को भी इससे जोड़ने की तैयारी है।
हर जिले में स्थापित होंगे विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र
मुख्य सचिव ने कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग की ओर से संचालित विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरे प्रदेश में विस्तार देने के निर्देश दिए। फिलहाल देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
सरकार की योजना है कि इन कार्यक्रमों का विस्तार कर प्रत्येक जिले में विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं। इसके लिए कौशल विकास विभाग के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में संचालित केंद्रों को भी प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
इस व्यवस्था से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के विद्यार्थियों और युवाओं को अपने जिले में ही विदेशी भाषा सीखने का अवसर मिल सकेगा। साथ ही, उन्हें प्रशिक्षण के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की जरूरत भी कम हो सकती है।
आईटीआई, मेडिकल और नर्सिंग के युवाओं को भी मिलेगा लाभ
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने विदेशी भाषा प्रशिक्षण का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से स्कूली विद्यार्थियों के अलावा आईटीआई में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं, चिकित्सा एवं नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवाओं और अन्य इच्छुक व्यक्तियों को भी जोड़ा जाए।
विदेशी भाषाओं का ज्ञान पर्यटन, आतिथ्य सेवाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कार्यक्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है। ऐसे में इस तरह के प्रशिक्षण से युवाओं के कौशल को बेहतर बनाने और उनके लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किन विदेशी भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा और प्रशिक्षण कब से शुरू होगा, इस संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भी ली जाएगी मदद
प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए दून विश्वविद्यालय में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की सेवाएं लेने का सुझाव भी दिया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योगदान देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए शैक्षणिक क्रेडिट या अन्य प्रोत्साहन देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करने का अवसर मिल सकता है और प्रशिक्षण केंद्रों को भी सहयोग मिलेगा।
सचिवालय की बैठक में कई अधिकारी रहे मौजूद
विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम के विस्तार को लेकर आयोजित बैठक में शासन और शिक्षा से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, विनय शंकर पांडेय, ज्योति यादव और दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में विदेशी भाषा प्रशिक्षण को प्रदेशव्यापी स्तर पर संचालित करने, मौजूदा केंद्रों का विस्तार करने और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में अटल उत्कृष्ट और राजीव नवोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को विदेशी भाषाएं सिखाने की प्रस्तावित योजना शिक्षा और कौशल विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। यदि प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होते हैं, तो स्कूली विद्यार्थियों से लेकर आईटीआई, मेडिकल और नर्सिंग क्षेत्र के युवाओं तक को इसका लाभ मिल सकता है। अब इस योजना के क्रियान्वयन, विदेशी भाषाओं के चयन और प्रशिक्षण शुरू होने की समयसीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार रहेगा।


