देहरादून | 15 जनवरी 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उत्तराखंड मंत्रिमंडल की अहम बैठक में राज्य के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 19 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) में संशोधन, उपनल कर्मियों के लिए समान वेतन, किसानों को राहत, पर्यटन नियमावली और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े बड़े निर्णय शामिल रहे।
यूसीसी में संशोधन को मंजूरी, अध्यादेश लाने की तैयारी
कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत जनवरी 2025 से पहले विवाह करने वालों को अब छह माह के बजाय एक वर्ष की अवधि में विवाह पंजीकरण कराना होगा।
इसके साथ ही रजिस्ट्रार जनरल का स्तर बढ़ाकर अपर सचिव स्तर के अधिकारी का कर दिया गया है। समय पर कार्य न होने पर अब जुर्माने (फाइन) की जगह दंडात्मक कार्रवाई (पेनाल्टी) का प्रावधान किया गया है। सरकार इस संशोधन को लागू करने के लिए जल्द ही अध्यादेश लाएगी।
उपनल कर्मियों के लिए राहत भरा फैसला
कैबिनेट बैठक में उपनल कर्मियों को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया। पहले जहां समान कार्य-समान वेतन के लिए 12 वर्ष की सेवा जरूरी थी, अब 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले उपनल कर्मियों को यह लाभ मिलेगा।
इस फैसले से लगभग 7,000 से 8,000 कर्मचारियों को सीधा लाभ होगा। साथ ही वर्ष 2018 से पहले कार्यरत शेष उपनल कर्मियों को भी अलग से लाभ देने का निर्णय लिया गया है। भविष्य में उपनल के माध्यम से केवल भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास से जुड़े कार्य ही कराए जाएंगे।
किसानों और चीनी मिलों को राहत
पेराई सत्र 2025-26 के लिए सरकार ने 270 करोड़ रुपये की शासकीय प्रतिभूति (स्टेट गारंटी) को मंजूरी दी है, जिससे चीनी मिलें आसानी से ऋण ले सकेंगी।
इसके अलावा गन्ना किसानों के लिए अगेती किस्म का मूल्य 405 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
पर्यटन नीति में बदलाव, स्थानीय लोगों को प्राथमिकता
उत्तराखंड पर्यटन की नई नियमावली को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली। अब होम-स्टे योजना का लाभ केवल स्थायी निवासियों को ही मिलेगा।
बाहरी राज्यों के लोग केवल ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट की सुविधा चला सकेंगे, उन्हें होम-स्टे जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के अधिक अवसर देना है।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगा विस्तार
सतेंद्र कुमार बनाम सीबीआई प्रकरण के तहत एनडीपीएस और पॉक्सो मामलों के लिए विशेष न्यायालयों के गठन का निर्णय लिया गया है।
राज्य में कुल 16 विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे, जिनमें 144 पद स्वीकृत किए गए हैं। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में 7 एडीजे और 9 एसीजेएम स्तर के न्यायालय स्थापित होंगे।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
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निर्वाचन विभाग की सेवा नियमावली को मंजूरी।
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम बदलकर उत्तराखंड संस्कृत संस्थान किया गया।
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यूकॉस्ट के तहत अल्मोड़ा और चंपावत साइंस सेंटर के लिए 6-6 पद स्वीकृत।
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ऊर्जा विभाग और वन निगम की वार्षिक रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी।
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बागवानी मिशन के तहत एंटी-हेलनेट पर केंद्र की 50% सहायता के साथ राज्य की ओर से 25% अतिरिक्त अनुदान।
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दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र के लिए 6 पद स्वीकृत।
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नंधौर सहित अन्य नदियों में खनन से जुड़े आदेशों में संशोधन।
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विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के लिए विधायक, सांसद और राज्य स्तर पर चैंपियन ट्रॉफी और नकद पुरस्कार की घोषणा।
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ब्रिडकुल अब रोपवे, टनल, कैविटी पार्किंग और ऑटोमेटेड पार्किंग परियोजनाएं भी विकसित करेगा।
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बीएनएस की धारा 330 के तहत आपसी सहमति वाले मामलों में विशेषज्ञ की अनिवार्यता समाप्त, नई नियमावली को मंजूरी।
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केदारनाथ धाम में गोबर और चीड़ की पत्तियों से बायो-मास पैलेट बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा।
निष्कर्ष
धामी कैबिनेट के इन फैसलों से उत्तराखंड में प्रशासनिक सुधार, कर्मचारियों और किसानों को राहत, पर्यटन में स्थानीय भागीदारी और न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यूसीसी में संशोधन और उपनल कर्मियों के लिए समान वेतन जैसे निर्णय सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जो आने वाले समय में राज्य के विकास को नई दिशा देंगे।


