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उत्तराखंड: बेटी से दुष्कर्म करने वाले वायुसेना कर्मी को 20 वर्षों की कठोर सजा

देहरादून | 15 जनवरी 2026

 उत्तराखंड की विशेष पॉक्सो अदालत ने बुधवार को एक जघन्य मामले में वायु सेना कर्मी को बच्ची से दुष्कर्म के आरोप में 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। इस खबर ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है और न्याय के साथ-साथ अपराधियों के प्रति कठोर संदेश भी दिया है।


पिता की जिम्मेदारी का उल्लंघन, मासूम की जिंदगी बर्बाद

अदालत में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अर्चना सागर ने अपने फैसले में कहा, “जिस पिता की जिम्मेदारी अपने बच्चे की रक्षा करना थी, उसी ने अपनी ही बेटी का शारीरिक और मानसिक शोषण किया। यह न केवल निंदनीय है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा खतरा है।”

यह मामला उत्तराखंड के एक छोटे से शहर का है, जहां एक वायुसेना कर्मी ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ कई वर्षों तक जघन्य अपराध को अंजाम दिया। अदालत ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।


पीड़िता का दर्द और पुलिस की कार्यवाही

पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसके पिता ने जब से वह 5-6 वर्ष की थी, तब से उसके साथ दुष्कर्म शुरू कर दिया था। उसने कहा कि वह अपनी बात किसी को न बताए, इसके लिए आरोपी ने उसे उसकी गुड़िया के हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी। आरोपी ने यह भी कहा कि हर पिता अपनी बेटी से ऐसा ही प्यार करता है, इसलिए वह उसे कोई शिकायत न करने की सलाह देता रहा।

वह वर्षो तक इस जुल्म को सहती रही, लेकिन नवंबर 2023 में उसकी हिम्मत जागी और उसने अपनी माँ को पूरी सच्चाई बताई। इसके बाद आरोपी ने फिर से गलत हरकत की, जिस पर उसकी माँ ने रायपुर पुलिस को सूचित किया। गिरफ्तारी से डरकर आरोपी फरार हो गया था, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।


न्याय का संदेश और समाज में जागरूकता

न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा, “ऐसे अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का शोषण सहन नहीं किया जाएगा।”

यह मामला न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि माता-पिता को अपनी जिम्मेदारी का सही से पालन करना चाहिए और बच्चों के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।


निष्कर्ष

यह मामला समाज में जागरूकता एवं कठोर कानून के पालन का प्रतीक बन चुका है। सरकार और समाज दोनों को चाहिए कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं और ऐसे अपराधों को जड़ से समाप्त करने के लिए कड़े कानून बनाएं। न्यायालय का यह फैसला उम्मीद की किरण है कि अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि पीड़ितों का मनोबल बना रहे और समाज में भय का माहौल कायम हो सके।

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