‘बल्लू’ की दिलचस्प रेस्क्यू कहानी बनी आकर्षण का केंद्र, वन मंत्री ने किया विशेष बाड़े का उद्घाटन
देहरादून | 7 मई 2026
देहरादून चिड़ियाघर में अब पर्यटकों को हिमालयन काले भालू का भी दीदार हो सकेगा। लंबे समय से इंतजार के बाद केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिलने पर हिमालयी काले भालू के लिए तैयार विशेष बाड़े को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस आधुनिक बाड़े का उद्घाटन करते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अब तक देहरादून जू में टाइगर और लेपर्ड जैसे वन्यजीव आकर्षण का केंद्र थे, लेकिन अब दुर्लभ हिमालयन काले भालू के शामिल होने से पर्यटकों का रोमांच और बढ़ने की उम्मीद है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाया गया भालू का बाड़ा
देहरादून जू के करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले सफारी जोन के भीतर हिमालयी काले भालू के लिए विशेष बाड़ा तैयार किया गया है। इस बाड़े को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के सभी मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुसार विकसित किया गया है।
बाड़े में प्राकृतिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है, ताकि भालू को जंगल जैसा माहौल मिल सके। इसमें खुले क्षेत्र, पेड़-पौधे और सुरक्षित विश्राम स्थल बनाए गए हैं। साथ ही पर्यटकों के लिए भी सुरक्षित दूरी से वन्यजीव को देखने की आधुनिक व्यवस्था की गई है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह बाड़ा आधुनिक जू प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
‘बल्लू’ की कहानी ने लोगों को किया भावुक
जू में रखा गया नर हिमालयी काला भालू केवल आकर्षण का केंद्र ही नहीं, बल्कि उसकी रेस्क्यू कहानी भी बेहद दिलचस्प है। इस भालू को वर्ष 2024 में चकराता वन प्रभाग की कानासर रेंज के त्यूणी क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था।
बताया गया कि उस समय यह करीब एक साल का था और अपनी मां से बिछड़कर रिहायशी इलाके में पहुंच गया था। गांव वालों ने पहले उसकी देखभाल की और बाद में वन विभाग को इसकी सूचना दी।
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से भालू का रेस्क्यू किया। बाद में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की अनुमति मिलने के बाद इसे 1 मई 2025 को देहरादून जू लाया गया।
पिछले एक वर्ष से इस भालू की विशेष निगरानी में देखभाल की जा रही थी। अब इसकी उम्र करीब दो साल हो चुकी है और वजन लगभग 40 से 50 किलोग्राम बताया जा रहा है। जू कर्मचारी और स्थानीय लोग इसे प्यार से ‘बल्लू’ नाम से पुकारते हैं।
जू में मादा भालू भी मौजूद, लेकिन अभी नहीं होगा प्रदर्शन
देहरादून जू में केवल नर भालू ही नहीं, बल्कि एक मादा हिमालयी काला भालू भी मौजूद है। हालांकि अभी उसे पर्यटकों के सामने नहीं लाया गया है, क्योंकि उसके प्रदर्शन के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिलना बाकी है।
यह मादा भालू वर्ष 2025 में गोपेश्वर क्षेत्र से रेस्क्यू की गई थी। वह लगातार रिहायशी इलाकों में दिखाई दे रही थी, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया था। बाद में वन विभाग ने उसे ट्रेंक्यूलाइज कर सुरक्षित तरीके से पकड़कर देहरादून जू में शिफ्ट किया।
मादा भालू की उम्र लगभग छह वर्ष बताई जा रही है और फिलहाल उसकी देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही है।
भालू के आने से बढ़ेगी देहरादून जू की रौनक
वन विभाग को उम्मीद है कि हिमालयी काले भालू के प्रदर्शन से देहरादून जू में पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी। पिछले वर्ष जब टाइगर को पर्यटकों के लिए खोला गया था, तब लगभग डेढ़ लाख पर्यटक जू पहुंचे थे और करीब 1.50 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
अब हिमालयन काले भालू के जुड़ने से वन्यजीव प्रेमियों और बच्चों के लिए आकर्षण और बढ़ जाएगा। खास बात यह है कि शहर के भीतर ही दुर्लभ वन्यजीव को देखने का अनुभव पर्यटकों के लिए बेहद खास रहने वाला है।
वन्यजीव संरक्षण और जागरूकता पर भी जोर
जू प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना भी है। अधिकारियों का मानना है कि जब लोग वन्यजीवों को करीब से देखेंगे, तब उनके संरक्षण और प्राकृतिक आवासों को बचाने के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ेगी।
उत्तराखंड में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में देहरादून जू वन्यजीव संरक्षण का प्रभावी संदेश देने का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
जल्द सफारी क्षेत्र में दिख सकते हैं सफेद बाघ और स्ट्राइप्ड हायना
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में देहरादून जू को और अधिक आकर्षक बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। सफारी क्षेत्र में जल्द सफेद बाघ और स्ट्राइप्ड हायना जैसे वन्यजीवों को भी लाने की तैयारी की जा रही है।
इसके साथ ही जू के सफारी क्षेत्र को पूरी तरह पर्यटकों के लिए खोलने की दिशा में भी विभाग तेजी से काम कर रहा है।
निष्कर्ष
देहरादून जू में हिमालयी काले भालू के नए बाड़े का खुलना वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन दोनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। ‘बल्लू’ की रेस्क्यू कहानी जहां लोगों को भावुक कर रही है, वहीं उसका सार्वजनिक प्रदर्शन पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गया है। आने वाले समय में यदि सफारी क्षेत्र और नए वन्यजीव भी शामिल होते हैं, तो देहरादून जू देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।


