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उत्तराखंड में नशा तस्करों की नई साजिश: पछवादून में स्मैक के साथ पकड़ा गया 12 वर्षीय किशोर, मासूमों को बनाया जा रहा ढाल

विकासनगर (पछवादून) | 15 जनवरी 2026

उत्तराखंड के पछवादून क्षेत्र में नशा तस्करी का एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां तस्करों द्वारा अब मासूम बच्चों और किशोरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। विकासनगर क्षेत्र के कुंजाग्रांट में स्मैक के साथ एक 12 वर्षीय किशोर के पकड़े जाने से नशा तस्करी के इस नए और खतरनाक चलन का खुलासा हुआ है।


बदलता ट्रेंड: महिलाओं के बाद अब बच्चों के कंधों पर नशे का बोझ

पछवादून क्षेत्र में सूखे नशे की तस्करी का तरीका लगातार बदलता जा रहा है। पहले नशा तस्करी के मामलों में महिलाओं की संलिप्तता सामने आ रही थी, लेकिन अब तस्करों ने कानून से बचने के लिए बच्चों और किशोरों को आगे कर दिया है।
स्मैक, चरस और गांजा जैसे नशीले पदार्थ अब मासूमों के हाथों से सप्लाई कराए जा रहे हैं, जिन्हें यह तक पता नहीं होता कि वे किस गैरकानूनी काम का हिस्सा बन रहे हैं।


कुंजाग्रांट बना नशा तस्करी का गढ़

स्थानीय लोगों के अनुसार कुंजाग्रांट क्षेत्र नशा तस्करी और बिक्री का केंद्र बनता जा रहा है। यहां से नशीले पदार्थों की आपूर्ति न केवल पछवादून बल्कि देहरादून और हरिद्वार तक की जा रही है।
अधिकांश मामलों में नशे की खेप उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के मिर्जापुर थाना क्षेत्र से आने की बात सामने आई है। पहले युवाओं ने जल्दी पैसे कमाने के लालच में इस अवैध धंधे को अपनाया, फिर महिलाएं जुड़ीं और अब बच्चों को मोहरा बनाया जा रहा है।


12 साल का बच्चा, जिसे खुद नहीं पता था सच्चाई

हालिया मामले में पकड़ा गया 12 वर्षीय किशोर देहरादून का रहने वाला है, जो अपनी खाला के घर कुंजाग्रांट आया हुआ था। बच्चे ने बताया कि उसे यह भी नहीं मालूम था कि वह क्या लेकर जा रहा है।
उसके अनुसार, उसकी खाला ने ‘काला’ नाम के व्यक्ति से यह सामान मंगवाया था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी बच्चों और किशोरों से नशा तस्करी कराने के कई मामले सामने आ चुके हैं।


तस्करों के घरों में कैमरे, पुलिस की निगरानी पर नजर

कुंजाग्रांट में नशा तस्करों और पैडलरों ने पुलिस से बचने के लिए अपने मकानों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं। जैसे ही पुलिस इलाके में पहुंचती है, कैमरों के जरिए सतर्क होकर तस्कर पीछे के रास्तों या छतों के सहारे फरार हो जाते हैं।
एसएसपी के निर्देश पर की गई पैदल गश्त के दौरान पुलिस को इस रणनीति की जानकारी मिली थी।


गश्त और जागरूकता के बावजूद नहीं थम रहा नशा कारोबार

पुलिस ने क्षेत्र में लंबे समय तक पैदल गश्त की और गांवों में गोष्ठियां आयोजित कर लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया। ग्रामीणों से सहयोग भी मांगा गया, लेकिन इसके बावजूद नशा तस्करी और बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है।


स्थानीय लोगों का आरोप: सिर्फ औपचारिक कार्रवाई

स्थानीय निवासी सादिर अली का कहना है कि पुलिस क्षेत्र में आती है, कुछ देर रुकती है और फिर लौट जाती है। कई बार नशीले पदार्थ मिलने पर भी उसे नष्ट कर मामला दबा दिया जाता है।
वहीं ग्राम प्रधान मुसव्विर अली ने कहा कि पुलिस एफआईआर तो दर्ज कर रही है, लेकिन ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। बच्चों और युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है और यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई तो हालात और भयावह होंगे।


पुलिस का दावा: जल्द चलेगा बड़ा अभियान

कोतवाली प्रभारी विकासनगर विनोद गुसाईं ने बताया कि बच्चे से स्मैक मंगवाने वाले व्यक्ति को पुलिस ने ट्रेस कर लिया है। कुंजाग्रांट क्षेत्र में नशे की बिक्री और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए जल्द ही एक बड़ा और सघन अभियान चलाया जाएगा।


निष्कर्ष

पछवादून में सामने आया यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी है। नशा तस्करों द्वारा मासूम बच्चों का इस्तेमाल करना एक खतरनाक संकेत है। यदि समय रहते सख्त और निरंतर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर गहरा असर डाल सकती है। अब जरूरत है ठोस रणनीति, जवाबदेही और समाज-पुलिस के संयुक्त प्रयासों की, ताकि नशे के इस जाल से मासूमों को बचाया जा सके।

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