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उत्तराखंड में साइबर अपराध पीड़ितों को बड़ी राहत, अब गुमनाम रहकर दर्ज करा सकेंगे ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत

देहरादून | 9 मई 2026

डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों के बीच अब पीड़ितों को बड़ी राहत मिली है। भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऐसी सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके जरिए लोग अपनी पहचान उजागर किए बिना भी ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बावजूद कई लोग सामाजिक डर, शर्म या पहचान सार्वजनिक होने की आशंका के चलते शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। इसी समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर “रजिस्टर एनोनिमसली” यानी गुमनाम शिकायत दर्ज करने का विकल्प शुरू किया गया है।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए पीड़ित को सबसे पहले साइबर क्राइम पोर्टल पर जाकर “Women/Children Related Crime” सेक्शन खोलना होगा। इसके बाद “Register Anonymously” विकल्प चुनकर शिकायत प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस दौरान शिकायतकर्ता को अपनी पहचान सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं होती।

शिकायत दर्ज करते समय घटना से जुड़ी पूरी जानकारी भरनी होती है, जिसमें घटना का प्रकार, तारीख, समय और संबंधित सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का विवरण शामिल होता है। इसके साथ ही आरोपी की आईडी, प्रोफाइल लिंक, यूआरएल और अन्य डिजिटल जानकारियां भी अपलोड की जा सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराध मामलों में डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पीड़ितों को सलाह दी गई है कि किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकी, ब्लैकमेलिंग, अश्लील संदेश, फर्जी प्रोफाइल या सोशल मीडिया पर परेशान किए जाने की स्थिति में स्क्रीनशॉट, चैट रिकॉर्ड और अन्य सबूत सुरक्षित रखें।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने कहा कि कई लोग पहचान उजागर होने के डर से शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। इसी कारण साइबर पोर्टल पर गुमनाम शिकायत की सुविधा दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड या उत्पीड़न का शिकार होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

इधर साइबर पुलिस ने फर्जी लोन ऐप्स को लेकर भी लोगों के लिए एडवायजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार साइबर ठग सोशल मीडिया पर आसान और तुरंत लोन देने के नाम पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि जैसे ही कोई व्यक्ति ऐसे फर्जी ऐप डाउनलोड करता है, ऐप मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी और निजी डाटा तक पहुंच बना लेता है। इसके बाद ठग तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक फोटो तैयार करते हैं और उन्हें रिश्तेदारों व परिचितों को भेजने की धमकी देकर पैसे की मांग करते हैं।

पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान या बिना सत्यापन वाले लोन ऐप को डाउनलोड न करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक विज्ञापनों और संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक करने से बचें। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके रिव्यू और विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच गुमनाम शिकायत दर्ज करने की सुविधा पीड़ितों के लिए बड़ा सहारा बन सकती है। यह कदम खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को बिना डर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करेगा। वहीं फर्जी लोन ऐप्स और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए डिजिटल सतर्कता और जागरूकता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।

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