स्थान: रुड़की / घोसीपुरा गांव
जनपद: हरिद्वार
तारीख: 27 अप्रैल 2026
हरिद्वार जनपद के मंगलौर कोतवाली क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां बच्चों के खेल-खेल में हुई लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। घोसीपुरा गांव में ट्रैक्टर की चपेट में आने से 8 साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है, वहीं परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
कैसे हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अप्रैल को घोसीपुरा गांव में कुछ बच्चे घर के बाहर खड़े एक ट्रैक्टर के पास खेल रहे थे। ट्रैक्टर में चाबी लगी हुई थी। खेल के दौरान बच्चों ने अनजाने में ट्रैक्टर की चाबी घुमा दी, जिससे ट्रैक्टर अचानक स्टार्ट हो गया और आगे बढ़ने लगा।
इसी दौरान पास में खड़ी 8 वर्षीय आयशा (पुत्री शाहरुख) ट्रैक्टर की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा इतना अचानक हुआ कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
घटना के तुरंत बाद परिजन घायल बच्ची को उपचार के लिए देहरादून के एक अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने मासूम की जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के चलते उपचार के दौरान आयशा ने दम तोड़ दिया।
परिवार और गांव में मातम
आयशा की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि आयशा की एक जुड़वां बहन भी है, जिससे इस हादसे ने परिवार को और गहरे सदमे में डाल दिया है।
घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है।
गांव प्रधान ने बताई घटना की पूरी जानकारी
गांव के प्रधान जावेद के अनुसार, बच्चे आपस में खेल रहे थे और पास में ट्रैक्टर खड़ा था। ट्रैक्टर में चाबी लगी होने के कारण बच्चे उस पर चढ़ गए और अनजाने में चाबी घुमा दी। ट्रैक्टर आगे बढ़ा और नीचे खड़ी आयशा उसकी चपेट में आ गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
पुलिस जांच में जुटी
मामले को लेकर मंगलौर कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भगवान सिंह मेहर ने बताया कि अभी तक इस संबंध में कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जानकारी में ट्रैक्टर घर का ही बताया जा रहा है।
बढ़ते हादसे और लापरवाही पर सवाल
हरिद्वार जनपद में सड़क और वाहन संबंधित हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि थोड़ी सी लापरवाही, खासकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर, कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
निष्कर्ष
घोसीपुरा गांव की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। घरों में खड़े वाहनों में चाबी लगी छोड़ना और बच्चों की गतिविधियों पर नजर न रखना खतरनाक साबित हो सकता है। इस दुखद हादसे ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली और एक परिवार को हमेशा के लिए गहरे दुख में डाल दिया। अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को रोका जा सके।


