स्थान: देहरादून/अल्मोड़ा, उत्तराखंड
तारीख: 20 अप्रैल 2026
संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर देशभर में सियासत तेज हो गई है। बिल के गिरने के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी विपक्ष पर निशाना साध रही है, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी विपक्ष को महिला विरोधी साबित करने के लिए एक सुनियोजित नैरेटिव गढ़ना चाहती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बीजेपी वास्तव में इस बिल को पास कराना चाहती थी, तो बिल गिरने के तुरंत बाद महिला सांसदों के पास नारे लिखी तख्तियां पहले से कैसे मौजूद थीं।
गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पहले से ही इस पूरे घटनाक्रम की तैयारी कर रखी थी और वह खुद इस बिल को गिराना चाहती थी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह किसी भी तरह से बहुमत जुटाकर इस बिल को पास करा सकती थी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी पर जनता को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता बीजेपी का “चाल, चरित्र और चेहरा” समझ चुकी है और इस तरह के नैरेटिव अब प्रभावी नहीं होंगे। गोदियाल ने यह भी कहा कि यदि यह बिल उद्योगपतियों से जुड़ा होता, तो बीजेपी हर संभव प्रयास कर इसे पास करा देती।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब राष्ट्र के नाम संबोधन जैसे गरिमामयी मंच का उपयोग विपक्ष को कोसने के लिए किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान बताया।
वहीं, उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी केंद्र सरकार पर महिलाओं के मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही महिला आरक्षण की समर्थक रही है और 2023 में संसद के दोनों सदनों में इस बिल को पारित कराने में विपक्ष की अहम भूमिका रही थी।
कुंजवाल ने सवाल उठाया कि लोकसभा की 543 सीटों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस कानून को लागू करने में देरी क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इसे जानबूझकर जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टालने की रणनीति अपनाई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 16 अप्रैल 2026 को इस बिल की अधिसूचना चुनावी माहौल को ध्यान में रखकर जारी की गई। साथ ही परिसीमन के जरिए राज्यों की सीटों में बदलाव कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने रोक दिया।
कुंजवाल ने देश की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे तथ्यों को समझें और किसी भी भ्रामक प्रचार से सावधान रहें। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस आज भी महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के पक्ष में है।
निष्कर्ष:
नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां बीजेपी इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर विपक्ष पर हमला कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति में और गर्माता नजर आ सकता है।


