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नेपाल सीमा से सटे उत्तराखंड के 40 गांवों के विकास का रोडमैप तैयार, सड़क से रोजगार तक बदलेगी तस्वीर

देहरादून, 19 मई 2026

नेपाल सीमा से लगे उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों को अब विकास की नई रफ्तार मिलने जा रही है। केंद्र सरकार ने पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधम सिंह नगर जिलों के 40 सीमांत गांवों को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (वीवीपी) 2.0 के तहत शामिल किया है। इन गांवों के लिए व्यापक विकास योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम होगा।


सीमांत गांवों को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर

केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य नेपाल सीमा से सटे गांवों को आत्मनिर्भर और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाना है। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे इन गांवों में अब आजीविका विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा।

योजना के तहत गांवों में सड़क संपर्क बेहतर किया जाएगा, ग्रिड से विद्युतीकरण किया जाएगा और दूरसंचार सेवाओं का विस्तार होगा। साथ ही स्थानीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।


जिलों से मांगे गए विकास प्रस्ताव

राज्य सरकार ने चयनित गांवों के लिए क्षेत्र विशेष रणनीति तैयार कर ली है। अब संबंधित जिलों से विस्तृत विकास योजनाओं के प्रस्ताव तैयार कराए जा रहे हैं।

इन प्रस्तावों में गांवों की भौगोलिक स्थिति, आवश्यकताओं और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं शामिल की जाएंगी। इसके बाद राज्य सरकार समग्र प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजेगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इन योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता पूरी तरह केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी।


आजीविका और स्वरोजगार पर रहेगा जोर

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2.0 के तहत सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों को ऐसे युवाओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर व्यवसाय या रोजगार शुरू करना चाहते हैं।

उन्हें प्रशिक्षण, कौशल विकास और सहकारिता योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि गांवों से पलायन कम हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।

इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के माध्यम से सुरक्षा बलों को स्थानीय सहयोग और समर्थन भी मजबूत किया जाएगा।


964 गांवों का भी हुआ सत्यापन

अपर सचिव ग्राम्य विकास एवं राज्य में वीवीपी की नोडल अधिकारी अनुराधा पाल के अनुसार चयनित 40 गांवों का सत्यापन कर जानकारी संबंधित पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है।

इसके साथ ही पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधम सिंह नगर जिलों के छह विकासखंडों के 964 गांवों का भी सत्यापन कराया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि जिलों से जैसे ही योजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त होंगे, उन्हें केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा ताकि जल्द से जल्द विकास कार्य शुरू किए जा सकें।


इन गांवों को मिला योजना में स्थान

चंपावत जिले के गांव

पसम, मांडुआ, तारकुली, अम्नी, सैलागाड, तामली, पोलप, देवीपुर, सैलानी गोट, नैघुंट और चूका।


पिथौरागढ़ जिले के गांव

बगड़ीहाट, द्वालीसेरा, ड्योड़ा, तितरी, चमतोली, बलतड़ी, गेठीगाड़ा, हल्दू, जमतड़ी, कनारी, क्वीतड़, तड़ेमिया, तड़ीगांव, रज्यूड़ा, फिलम, कालिका, रमतोली, धारचूला देहात, जुम्मा, स्यांकुरी, जयकोट, पांगला, बूंदी और खेत।


ऊधम सिंह नगर जिले के गांव

बनमाहोलिया, नारायण नगर (डाम गारा), कुमराहा, सिसिया-बन्धा और नगला तराई।


सीमांत क्षेत्रों में बदलेगी विकास की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2.0 सीमांत गांवों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। इससे जहां आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी, वहीं युवाओं को गांवों में ही रोजगार मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पर्यटन, हस्तशिल्प, कृषि और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


निष्कर्ष

नेपाल सीमा से जुड़े उत्तराखंड के गांव लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं। अब वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2.0 के जरिए इन गांवों को आधुनिक सुविधाओं, रोजगार और बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है। यदि योजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो सीमांत क्षेत्रों की तस्वीर बदलने के साथ ही पलायन रोकने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

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