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पहली ही बारिश में उखड़ गई नई सड़क, मालदेवता में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा; सड़क बहाली को लेकर अधिकारियों से विवाद

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स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 29 जुलाई 2026

राजधानी देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ महीने पहले तैयार की गई सड़क पहली ही बरसात में जगह-जगह धंस गई, जिससे कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया। सड़क बहाली में देरी को लेकर ग्रामीणों और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारियों के बीच तीखा विवाद भी सामने आया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया।

मालदेवता से सोंग डैम होते हुए सौंदना गांव तक जाने वाला मोटर मार्ग लगातार बारिश के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क पर कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि पांच से छह जगहों पर भूस्खलन होने से मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सड़क की ब्लैक टॉपिंग का कार्य इसी वर्ष मई महीने में पूरा किया गया था, लेकिन सड़क पहली ही बरसात का दबाव नहीं झेल सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नई सड़क का कुछ ही महीनों में इस तरह टूट जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग क्षेत्र की लगभग 10 से 12 ग्राम पंचायतों को देहरादून शहर से जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा है। इसी सड़क से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, सरकारी और निजी कर्मचारी, किसान, व्यापारी तथा अन्य ग्रामीण आवागमन करते हैं। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है और कई स्थानों पर दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।

तोला काटल गांव निवासी योगेंद्र पंवार ने बताया कि सड़क का निर्माण हिमालयन कंपनी द्वारा किया गया था। उनका कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सड़कें प्रभावित होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन हाल ही में बनी सड़क का कुछ ही महीनों में इस स्थिति में पहुंच जाना गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करता है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और दोषी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इसी बीच मालदेवता क्षेत्र में सड़क बहाली को लेकर एक और विवाद सामने आया। आरोप है कि क्षतिग्रस्त मार्ग को खोलने में हो रही देरी के दौरान ग्राम प्रधान सहित कुछ लोगों और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों के बीच कहासुनी हो गई, जो बाद में विवाद में बदल गई। विभाग का आरोप है कि इस दौरान अधिकारियों और वाहन चालक के साथ मारपीट की गई, जिसमें चालक घायल हो गया। घटना के बाद विभाग की ओर से पुलिस को शिकायत देकर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

दूसरी ओर ग्राम प्रधान सेरकी श्याम पयाल ने विभाग के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सेरकी-भैंसवाड़ गांव मोटर मार्ग कई स्थानों पर टूट गया था। देहरादून से सरोना को जोड़ने वाली करीब 17 किलोमीटर लंबी सड़क आठ से दस स्थानों पर बाधित हो गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हो गया।

श्याम पयाल के अनुसार बुधवार सुबह जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने क्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली थी। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अपने अधीन आने वाले मार्गों पर राहत कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन पीएमजीएसवाई के अंतर्गत आने वाली सड़क पर कोई मशीन या टीम नहीं पहुंची। उनका आरोप है कि संबंधित जूनियर इंजीनियर से सड़क जल्द खुलवाने का अनुरोध करने पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला और अधिकारियों का रवैया भी सहयोगात्मक नहीं था।

ग्राम प्रधान ने बताया कि सड़क बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोग घंटों तक रास्ते में फंसे रहे। इनमें स्कूली बच्चे, नौकरीपेशा कर्मचारी, मरीज, महिलाएं और एक प्रसव पीड़िता भी शामिल थी। उनका कहना है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद समय पर मशीनें नहीं पहुंचीं। जब देर शाम अधिकारी मौके पर पहुंचे तो स्थानीय लोगों में पहले से मौजूद नाराजगी और बढ़ गई, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालांकि बाद में स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत कराया गया।

श्याम पयाल ने यह भी दावा किया कि लगातार बारिश के कारण क्षेत्र की कई अन्य सड़कें भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। उन्होंने खराब सड़कों की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए प्रशासन से तत्काल राहत कार्य, सड़क मरम्मत और प्रभावित मार्गों को सुरक्षित रूप से बहाल करने की मांग की है।

मालदेवता क्षेत्र की ये दोनों घटनाएं भले ही अलग-अलग हों, लेकिन दोनों ने पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, समय पर रखरखाव और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि लोगों की जीवनरेखा होती हैं। ऐसे में निर्माण कार्य में गुणवत्ता, नियमित निगरानी और आपदा के समय त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

निष्कर्ष:

मालदेवता में पहली ही बारिश में नई सड़क का क्षतिग्रस्त होना और सड़क बहाली को लेकर प्रशासन व ग्रामीणों के बीच विवाद यह दर्शाता है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और आपदा प्रबंधन व्यवस्था में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। स्थानीय लोग क्षतिग्रस्त सड़कों की निष्पक्ष तकनीकी जांच, जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा सभी प्रभावित मार्गों को शीघ्र सुरक्षित रूप से बहाल करने की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस विवाद से जुड़े मामले की जांच कर रही है और प्रशासन क्षेत्र में राहत एवं मरम्मत कार्य तेज करने का दावा कर रहा है।

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