स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड | तिथि: 14 अप्रैल 2026
बैसाखी के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। बैसाखी के अवसर पर दूर-दराज से आए श्रद्धालु हर की पैड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।
गंगा घाटों पर तड़के से उमड़ी भीड़
सुबह होते ही देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। “गंगा मैया की जय” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
विशेष स्नान का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार बैसाखी के दिन सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं, जिससे इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।
हवन-पूजन और देव डोलियों का स्नान
श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ-साथ हवन-पूजन कर परिवार की सुख-शांति की कामना की। पहाड़ी क्षेत्रों से आई देव डोलियों को भी गंगा स्नान कराया गया, जिससे धार्मिक आस्था का विशेष दृश्य देखने को मिला।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
बैसाखी पर्व और सद्भावना सम्मेलन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पूरे मेला क्षेत्र को 10 जोन और 33 सेक्टर में बांटा गया है। पुलिस के साथ पीएसी, बम निरोधक दस्ता (BDS) और जल पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।
नवनीत सिंह भुल्लर, अभय प्रताप सिंह और शिशुपाल सिंह नेगी समेत तमाम अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।
यातायात और बाजारों में भी दिखी रौनक
भीड़ को देखते हुए शहर में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। वहीं बाजारों में भी बैसाखी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला और धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा।
निष्कर्ष
आस्था, श्रद्धा और उत्साह के संगम के बीच हरिद्वार में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। गंगा स्नान, दान-पुण्य और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास का प्रतीक बनकर सामने आया है।


