स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 31 जुलाई 2026
उत्तराखंड में सेवा नियमावली लागू करने, नए पदों के सृजन और लंबित भर्तियां शुरू करने की मांग को लेकर मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड के बैनर तले बेरोजगार डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नीशियनों ने शुक्रवार को राजधानी देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। गांधी पार्क से मुख्यमंत्री आवास की ओर निकाले गए पैदल मार्च को पुलिस ने हाथीबड़कला क्षेत्र में बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोक-झोंक भी देखने को मिली।
प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे कई आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद में सभी प्रदर्शनकारियों को एकता विहार स्थित धरना स्थल पर छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारियों ने सरकार पर उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया।
दरअसल, प्रदेशभर के बेरोजगार डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नीशियन पिछले 74 दिनों से एकता विहार धरना स्थल पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें मुख्यमंत्री आवास कूच करने का निर्णय लेना पड़ा।
इस आंदोलन को केवल मेडिकल लैब टेक्नीशियनों का ही नहीं, बल्कि एलाइड हेल्थ साइंस से जुड़े कई अन्य संवर्गों का भी समर्थन मिला। प्रदर्शन में रेडियोलॉजी टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्रिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, ओटी टेक्नीशियन सहित अन्य स्वास्थ्य पेशेवर भी शामिल हुए और सरकार से जल्द समाधान की मांग की।
मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड के महासचिव मयंक राणा ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बावजूद मेडिकल लैब टेक्नीशियन संवर्ग की सेवा नियमावली आज तक लागू नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशिक्षित एवं पंजीकृत डिग्रीधारी युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर नहीं मिल रहे हैं, जिससे हजारों योग्य अभ्यर्थी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के अनुरूप मेडिकल लैब टेक्नीशियनों के नए पद सृजित करने, लंबित सेवा नियमावली को शीघ्र लागू करने तथा रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी अस्पतालों की लैब सेवाओं के निजीकरण और आउटसोर्सिंग का भी कड़ा विरोध जताया।
एक्स-रे टेक्नीशियन संवर्ग के प्रतिनिधि डॉ. गौतम रतूड़ी ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि पैरामेडिकल क्षेत्र में एक्स-रे, लैब, डायलिसिस और अन्य तकनीकी सेवाओं से जुड़े हजारों प्रशिक्षित युवा वर्षों से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने आईपीएचएस मानकों को लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघ के अध्यक्ष आशीष चंद्र ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नीशियनों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि 74 दिनों से शांतिपूर्ण धरना देने के बावजूद सरकार ने उनकी न्यायोचित मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी है।
संघ की प्रमुख मांगें
- आईपीएचएस मानकों के अनुरूप डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नीशियनों के पर्याप्त पदों का सृजन किया जाए।
- मेडिकल लैब टेक्नीशियन संवर्ग की सेवा नियमावली वर्षवार मेरिट के आधार पर लागू कर नियमित एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- भर्ती में देरी के कारण आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को एकमुश्त आयु सीमा में छूट प्रदान की जाए।
- सरकारी अस्पतालों की लैब सेवाओं के निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी चारों प्रमुख मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
निष्कर्ष
देहरादून में मेडिकल लैब टेक्नीशियनों का मुख्यमंत्री आवास कूच यह संकेत देता है कि लंबे समय से लंबित सेवा नियमावली और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रशिक्षित युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह इन मांगों पर क्या फैसला लेती है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन प्रदेशभर में और व्यापक रूप ले सकता है।


