दिनांक: 7 अगस्त 2026
स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा अब अपने सबसे व्यस्त दौर में पहुंच गई है। डाक कांवड़ वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक तकनीक से मजबूत कर दिया है। पूरे मेला क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के साथ 10 ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। वहीं, गंगा घाटों पर एसडीआरएफ की टीमें लगातार मुस्तैद हैं। कांवड़ मेला शुरू होने के बाद अब तक गंगा के तेज बहाव में फंसे 37 कांवड़ियों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बचाया जा चुका है।
एडीजी ने कंट्रोल रूम पहुंचकर परखी सुरक्षा व्यवस्था
कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले सीसीआर भवन में स्थापित कमांड कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया।
कंट्रोल रूम में उन्होंने सीसीटीवी कैमरों के जरिए मेला क्षेत्र में भीड़ की स्थिति, प्रमुख चौराहों, मार्गों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी व्यवस्था देखी। इस दौरान हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर समेत अन्य अधिकारियों से भीड़ नियंत्रण, यातायात संचालन और सुरक्षा तैयारियों की जानकारी ली।
एडीजी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी भीड़ का दबाव बढ़ता दिखाई दे, वहां बिना देरी किए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसके बाद उन्होंने प्रमुख चौराहों, पार्किंग स्थलों और हाईवे का भी निरीक्षण किया।
डाक कांवड़ वाहनों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चुनौती
डाक कांवड़ के दौरान शिवभक्त कम समय में गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। ऐसे में हरिद्वार और आसपास के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
पुलिस ने डाक कांवड़ वाहनों के लिए अलग-अलग रूट और डायवर्जन व्यवस्था लागू की है। मेरठ, सहारनपुर, नोएडा, दिल्ली और हरियाणा की ओर से आने वाले डाक कांवड़ वाहनों को नगला इमरती बाईपास से डायवर्ट कर पहले लक्सर और फिर हरिद्वार की ओर भेजा जा रहा है।
जगजीतपुर डायवर्जन प्वाइंट से वाहनों को बैरागी कैंप पार्किंग की ओर भेजा जा रहा है। बैरागी कैंप हरिद्वार की सबसे अधिक क्षमता वाली पार्किंग में शामिल है। रूट डायवर्जन के चलते नगला इमरती बाईपास पर वाहनों की लंबी कतार भी देखने को मिल रही है।
500 से ज्यादा CCTV और 10 ड्रोन से निगरानी
कांवड़ मेले में भीड़ और सुरक्षा पर नजर रखने के लिए पुलिस ने तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया है। पूरे मेला क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनके अलावा 10 ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, गंगा घाटों, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था में साइबर कमांडो की भी तैनाती की गई है। कमांड कंट्रोल रूम से प्राप्त लाइव इनपुट के आधार पर पुलिस और प्रशासन जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई कर सकते हैं।
हाईटेक ड्रोन से गंगा घाटों पर भी नजर
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से एसडीआरएफ को हाईटेक कमर्शियल ड्रोन उपलब्ध कराया गया है। यह व्हीकल-माउंटेड ड्रोन है, जिसे वाहन के माध्यम से किसी भी स्थान पर ले जाकर संचालित किया जा सकता है।
ड्रोन की मदद से गंगा घाटों पर भीड़, संवेदनशील क्षेत्रों और मेला क्षेत्र की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। किसी आकस्मिक घटना की स्थिति में ड्रोन से मौके की जानकारी तेजी से प्राप्त कर रेस्क्यू टीम को सही स्थान पर भेजने में मदद मिल रही है।
गंगा में बह रहे 37 कांवड़ियों को बचाया
कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा घाटों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। मेला शुरू होने के बाद अब तक गंगा के तेज बहाव में बह रहे 37 कांवड़ियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
एसडीआरएफ के जवान संवेदनशील घाटों पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट और गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाटों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
एसडीआरएफ सेनानायक ने भी लिया तैयारियों का जायजा
एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने हरिद्वार पहुंचकर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का निरीक्षण किया। उनके नेतृत्व में हाईवे से गुजर रहे कांवड़ियों को फल और पानी भी वितरित किया गया।
एसडीआरएफ की टीमें गंगा घाटों के अलावा यात्रा मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू के लिए टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
पिछले वर्ष कांवड़ मेले के दौरान 95 रेस्क्यू अभियानों में 165 लोगों की जान बचाई गई थी। इस वर्ष भी प्रशासन ने संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और आपात स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
एडीजी ने कांवड़ियों से की सुरक्षित यात्रा की अपील
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन ने कहा कि कांवड़ मेले की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं और यातायात संचालन के लिए ठोस प्लान तैयार किया गया है।
उन्होंने कांवड़ियों से संयम और सावधानी के साथ यात्रा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा आस्था का पर्व है और सभी शिवभक्त यातायात नियमों का पालन करें। प्रशासन की ओर से निर्धारित रूट, पार्किंग और अन्य व्यवस्थाओं का पालन करने से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के बढ़ते दबाव के बीच पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ ने सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक और त्वरित रेस्क्यू सिस्टम से मजबूत किया है। 500 से अधिक सीसीटीवी, 10 ड्रोन, कमांड कंट्रोल रूम और संवेदनशील घाटों पर तैनात एसडीआरएफ की टीमें चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर और मौसम की चुनौती को देखते हुए श्रद्धालुओं से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और गहरे पानी में जाने से बचने की अपील की गई है।


