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20 वर्षों बाद बदलेगी एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची, शिक्षा विभाग ने अंतिम सूची तैयार करने के दिए निर्देश

देहरादून | 13 जुलाई 2026

उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित एलटी (लाइसेंस्ड टीचर) शिक्षकों की वरिष्ठता को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। करीब दो दशक से चले आ रहे वरिष्ठता विवाद के समाधान की दिशा में शिक्षा निदेशालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वर्ष 1992 से 1996 के बीच नियुक्त और पदोन्नत एलटी शिक्षकों की अनंतिम वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने के निर्देश जारी किए हैं। नई वरिष्ठता सूची लागू होने के बाद हजारों शिक्षकों की सेवा स्थिति और पदोन्नति के अवसर प्रभावित होंगे।

लोक सेवा प्राधिकरण के फैसले के बाद तेज हुई प्रक्रिया

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह कार्रवाई लोक सेवा प्राधिकरण द्वारा निष्पादन याचिका में दिए गए निर्णय के अनुपालन में की जा रही है। रूपचंद लखेड़ा एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर प्रकरण में 5 जनवरी 2023 को दिए गए आदेश के आधार पर वर्ष 1992 से 1996 तक मौलिक रूप से नियुक्त और पदोन्नत एलटी शिक्षकों की अनंतिम वरिष्ठता सूची तैयार कर निदेशालय को उपलब्ध कराई गई थी।

अब विभाग ने इस सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अंतिम सूची तैयार करने के दिए गए निर्देश

शिक्षा विभाग ने अपर शिक्षा निदेशक, गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडल को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वर्ष 1992 से 1996 की एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देकर शीघ्र शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराया जाए।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रेमलता बौडाई एवं अन्य आठ याचिकाओं में भी अंतिम निर्णय आ चुका है और सभी याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। ऐसे में अब वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने में कोई कानूनी बाधा शेष नहीं है।

हजारों शिक्षकों की वरिष्ठता पर पड़ेगा असर

नई वरिष्ठता सूची लागू होने के बाद प्रदेशभर के लगभग चार हजार शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होने की संभावना है। वहीं, लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित कई एलटी शिक्षक वरिष्ठता सूची में ऊपर आ जाएंगे, जिससे उन्हें पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

दूसरी ओर, कुछ ऐसे शिक्षक जो अब तक वरिष्ठता सूची में आगे थे, उनकी स्थिति बदल सकती है और वे वरिष्ठता क्रम में पीछे चले जाएंगे।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला सीटी (सर्टिफिकेट टीचर) से एलटी में संविलियन किए गए शिक्षकों और लोक सेवा आयोग से सीधे चयनित एलटी शिक्षकों के बीच वरिष्ठता निर्धारण से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता रूपचंद लखेड़ा के अनुसार, वर्ष 2005 में शिक्षा विभाग ने सीटी शिक्षकों को निर्धारित 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही 5 वर्ष की सेवा पर एलटी संवर्ग में शामिल कर उन्हें वरिष्ठता का लाभ दे दिया था। इससे लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हुई और वे वरिष्ठता सूची में हजारों स्थान नीचे चले गए।

इसी निर्णय को चुनौती देते हुए न्यायालय और लोक सेवा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया गया था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अब आयोग से चयनित शिक्षकों के पक्ष में फैसला आने से वरिष्ठता सूची में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है।

पदोन्नति और सेवा लाभों पर भी पड़ेगा प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित वरिष्ठता सूची का सीधा प्रभाव शिक्षकों की पदोन्नति, विभागीय चयन, स्थानांतरण और अन्य सेवा संबंधी लाभों पर पड़ेगा। इसलिए विभाग इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और न्यायिक आदेशों के अनुरूप पूरा करने की तैयारी में है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची का लगभग 20 वर्षों बाद संशोधन शिक्षा विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। न्यायिक आदेशों के अनुपालन में तैयार की जा रही अंतिम वरिष्ठता सूची से हजारों शिक्षकों की सेवा स्थिति प्रभावित होगी। नई सूची लागू होने के बाद पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों का निर्धारण भी संशोधित वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा, जिससे लंबे समय से लंबित विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।

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