देहरादून/नई दिल्ली, 7 जून 2026
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी बहुप्रतीक्षित किसाऊ बांध परियोजना को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। लंबे समय से विभिन्न कारणों से अटकी इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना को अब जल्द निर्माण चरण में लाने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को नई दिल्ली में परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। बैठक में उत्तराखंड समेत छह राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
छह माह से गृह मंत्रालय कर रहा सीधी निगरानी
सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय पिछले लगभग छह महीनों से किसाऊ बांध परियोजना की प्रगति पर सीधे नजर बनाए हुए है। केंद्र सरकार का उद्देश्य परियोजना से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का समाधान कर निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करना है।
सोमवार को होने वाली बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और केंद्र सरकार के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। उत्तराखंड की ओर से मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन, यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे।
16 जून को मुख्यमंत्री धामी के साथ होगी विशेष बैठक
अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 16 जून को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ अलग से बैठक करेंगे। इस बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन, राज्य हितों और विभिन्न प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
राज्य सरकार इस परियोजना को उत्तराखंड के ऊर्जा और सिंचाई क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मान रही है।
आठ दशक पुरानी है परियोजना की परिकल्पना
किसाऊ बांध परियोजना का इतिहास काफी पुराना है। इसकी अवधारणा वर्ष 1940 के दशक में सामने आई थी। इसके बाद वर्ष 1996 में पहली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई, लेकिन पर्यावरणीय आपत्तियों और अन्य तकनीकी कारणों से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया। इसके बाद नई डीपीआर तैयार करने का निर्णय लिया गया, लेकिन विभिन्न कारणों से प्रक्रिया फिर धीमी पड़ गई। वर्ष 2021 में संशोधित डीपीआर तैयार करने की दिशा में कार्य शुरू हुआ, जो अब पूर्ण हो चुका है।
15 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनेगी परियोजना
नई संशोधित डीपीआर के अनुसार किसाऊ बांध परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। परियोजना को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है, जहां पर्यावरणीय एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया चल रही है।
केंद्र सरकार चाहती है कि सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
एशिया की दूसरी सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल
किसाऊ बांध परियोजना को टिहरी बांध के बाद एशिया की दूसरी सबसे बड़ी बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजनाओं में गिना जाता है। परियोजना के पूर्ण होने पर लगभग 660 मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता विकसित होगी।
इसमें उत्तराखंड को लगभग 350 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी, जबकि शेष ऊर्जा का लाभ अन्य साझेदार राज्यों को मिलेगा।
सिंचाई और जल संकट समाधान में भी निभाएगी बड़ी भूमिका
परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इसके अलावा यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ाने और भविष्य में संभावित जल संकट को कम करने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
17 गांव होंगे प्रभावित, 1000 परिवारों का होगा विस्थापन
परियोजना के निर्माण से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुल 17 गांव जलमग्न क्षेत्र में आ जाएंगे। इसके चलते करीब एक हजार परिवारों को विस्थापित होना पड़ेगा।
पुनर्वास और मुआवजा योजना को लेकर भी सरकार स्तर पर विचार-विमर्श जारी है, ताकि प्रभावित परिवारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हिमाचल प्रदेश की सहमति बनी बड़ी चुनौती
किसाऊ बांध परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिमाचल प्रदेश की पूर्ण सहमति मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल प्रदेश पहले से ही ऊर्जा उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर और ऊर्जा अधिशेष राज्य है।
वहीं परियोजना से प्रभावित होने वाला बड़ा भूभाग भी हिमाचल प्रदेश में आता है। इसी कारण राज्य की ओर से अपेक्षित स्तर की सक्रियता अब तक देखने को नहीं मिली है। हालांकि गृह मंत्रालय के सीधे हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सभी छह हितधारक राज्यों के बीच जल्द सहमति बन जाएगी।
निष्कर्ष
करीब आठ दशक पुराने इतिहास वाली किसाऊ बांध परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। गृह मंत्रालय की सक्रिय निगरानी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की समीक्षा बैठक और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ प्रस्तावित चर्चा से परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यदि सभी राज्यों के बीच सहमति बनती है और आवश्यक मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो यह परियोजना उत्तराखंड समेत छह राज्यों के लिए ऊर्जा, सिंचाई और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।


