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उत्तराखंड में अग्निवीरों के लिए रोजगार की बड़ी तैयारी, 31 दिसंबर से पहले सक्रिय होगा ‘अग्निवीर रोजगार सेल’

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 20 जुलाई 2026

चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य में प्रस्तावित अग्निवीर रोजगार सेल (एआरसी) का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सेना में अर्जित अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी कौशल को विभिन्न सरकारी एवं निजी क्षेत्रों की आवश्यकताओं से जोड़कर अग्निवीरों के लिए बेहतर करियर अवसर तैयार करना है।

सोमवार को देहरादून स्थित प्रेस क्लब में उत्तराखंड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष एवं यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने अग्निवीर रोजगार सेल की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सेना से अग्निवीरों का पहला बैच 31 दिसंबर 2026 को उत्तराखंड लौटेगा, जिसमें लगभग 1,200 अग्निवीर शामिल होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि उनके लौटने से पहले रोजगार सेल पूरी तरह कार्यशील हो जाए।

कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि रोजगार सेल प्रत्येक अग्निवीर की शैक्षणिक योग्यता, व्यक्तिगत रुचि, सैन्य प्रशिक्षण और सेवा के दौरान प्राप्त अनुभव का विस्तृत मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर उन्हें सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योगों, कॉरपोरेट कंपनियों और अन्य संस्थानों में रोजगार के उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में विशेष तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। ऐसे में अग्निवीरों को उद्योगों और संस्थानों की मांग के अनुरूप तैयार करने के लिए अल्पकालिक कैप्सूल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य अग्निवीरों के कौशल को और अधिक व्यावसायिक बनाना होगा, ताकि उन्हें रोजगार प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

रोजगार सेल ने अब तक 50 से अधिक रोजगार क्षेत्रों की पहचान की है, जहां अग्निवीरों के अनुभव और कौशल का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। इनमें आपदा प्रबंधन, पर्यटन, होटल एवं आतिथ्य उद्योग, सुरक्षा सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, आधारभूत संरचना विकास, कृषि, खेल तथा विभिन्न सेवा क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

कर्नल कोठियाल ने कहा कि सेना में कार्यरत रहने के दौरान अग्निवीर अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, संकट प्रबंधन, टीम वर्क और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण गुण विकसित करते हैं। यही विशेषताएं उन्हें नागरिक क्षेत्र में भी अन्य युवाओं की तुलना में अधिक सक्षम बनाती हैं। इसलिए निजी उद्योगों और कॉरपोरेट संस्थानों को भी उनके अनुभव का लाभ मिल सकेगा।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पहले ही अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की व्यवस्था कर चुकी है। अब अग्निवीर रोजगार सेल के माध्यम से निजी क्षेत्र में भी उनके लिए सुनियोजित रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए विभिन्न औद्योगिक संगठनों, उद्योग परिसंघों और कॉरपोरेट कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।

अजय कोठियाल ने जानकारी दी कि अग्निवीर रोजगार सेल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की निगरानी में कार्य करेगा। इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और अग्निवीरों से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सरकार की योजना है कि 31 दिसंबर को पहला बैच लौटने से पहले ही रोजगार सेल पूरी तरह सक्रिय हो जाए, ताकि लौटते ही अग्निवीरों को रोजगार, प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा सकें और उन्हें नई भूमिका में शीघ्र स्थापित होने का अवसर मिले।

निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार की अग्निवीर रोजगार सेल पहल राज्य के पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह योजना निर्धारित समय पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो सेना से लौटने वाले युवाओं को न केवल रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि उनके सैन्य अनुभव और कौशल का उपयोग राज्य के विकास तथा निजी उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी किया जा सकेगा। इससे अग्निवीरों के लिए सेवा के बाद सम्मानजनक और सुनियोजित करियर का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

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