स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
तारीख: 31 जुलाई 2026
हरिद्वार जिले की श्यामपुर रेंज में जंगली हाथी के हमले में वन गुर्जर की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते वन विभाग ने शव परिजनों को सौंप दिया, लेकिन वन्यजीव हमले में मिलने वाले सरकारी मुआवजे की प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बिना नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की जा सकती।
जानकारी के अनुसार, यह घटना हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के कांसवाली बीट क्षेत्र में गुरुवार सुबह हुई। मृतक की पहचान 65 वर्षीय एहसान पुत्र यूसुफ के रूप में हुई है, जो पास की वन गुर्जर बस्ती के निवासी थे। बताया जा रहा है कि वह सुबह अपने बेटे और एक पड़ोसी के साथ मोटरसाइकिल से आबादी क्षेत्र की ओर जा रहे थे। इसी दौरान जंगल के रास्ते में अचानक एक जंगली हाथी सामने आ गया और उसने हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी के हमले के दौरान मृतक का बेटा और साथ मौजूद पड़ोसी किसी तरह पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन एहसान हाथी की चपेट में आ गए। हाथी ने उन्हें पटक दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद काफी देर तक हाथी घटनास्थल के आसपास ही मौजूद रहा, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना रहा।
घटना की सूचना मिलते ही श्यामपुर रेंज अधिकारी विवेक जोशी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय पुलिस को भी बुलाया गया और वन कर्मियों ने ग्रामीणों की सहायता से हाथी को वापस जंगल की ओर खदेड़ा। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की।
इसी दौरान मृतक के परिजनों और वन गुर्जर समुदाय के लोगों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव का पोस्टमार्टम कराना उचित नहीं माना जाता। समुदाय के प्रतिनिधियों ने विभाग के सामने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए शव बिना पोस्टमार्टम के सौंपने की मांग की।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीव हमले में मृतक के परिजनों को मुआवजा देने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट आवश्यक दस्तावेज होती है। चूंकि परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराया, इसलिए निर्धारित नियमों के तहत आर्थिक सहायता स्वीकृत नहीं की जा सकती। विभाग ने सभी कानूनी औपचारिकताओं के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
श्यामपुर रेंज अधिकारी विवेक जोशी ने बताया कि जिस क्षेत्र में यह घटना हुई है, वहां जंगली हाथियों की नियमित आवाजाही रहती है। वन विभाग पहले से ही इलाके में गश्त कर रहा था, लेकिन इस घटना के बाद संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त को और बढ़ा दिया गया है। साथ ही स्थानीय लोगों और वन गुर्जर समुदाय को जंगल के भीतर आवागमन के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह भी दी गई है।
निष्कर्ष
श्यामपुर रेंज में हुई यह दुखद घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। वहीं, धार्मिक परंपराओं और सरकारी नियमों के बीच उत्पन्न स्थिति के कारण मृतक परिवार मुआवजे से भी वंचित रह गया। वन विभाग ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने का आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


