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उत्तराखंड में 5.26 लाख अनमैप्ड मतदाताओं पर चुनाव आयोग की विशेष नजर, बड़े अधिकारियों को जिलावार सौंपी गई जिम्मेदारी

स्थान: देहरादून
तारीख: 4 अगस्त 2026

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दूसरे चरण के दौरान चुनाव आयोग ने अनमैप्ड मतदाताओं को लेकर अपनी निगरानी और तेज कर दी है। प्रदेश में 5.26 लाख अनमैप्ड मतदाताओं और 19.04 लाख विसंगति (एनॉमली) वाले मतदाताओं के मामलों की जांच जारी है। इसी बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरे प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में उतरकर स्थिति का जायजा लेने और मतदाताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

निर्वाचन विभाग के अनुसार एसआईआर के दूसरे चरण में जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जा रहा है। बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने के कारण कई स्थानों पर मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति भी देखने को मिल रही है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने अब विशेष रूप से उन 5,26,228 मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है, जिनकी प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मैपिंग नहीं हो सकी थी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने मंगलवार को देहरादून जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एसआईआर के तहत जारी नोटिसों की सुनवाई की प्रक्रिया का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने मतदान केंद्रों पर पहुंचे मतदाताओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि फील्ड विजिट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सामने आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों को समझना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

निर्वाचन विभाग ने प्रदेश के सभी मंडल आयुक्तों, जिलाधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को नियमित फील्ड विजिट करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि सामान्य विसंगति वाले मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दस्तावेजों का सत्यापन कर अपने स्तर पर ही मामलों का निस्तारण करें, ताकि मतदाताओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिए हैं कि जिन मतदाताओं की प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मैपिंग नहीं हो पाई थी, उनके मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए। ऐसे मामलों की सुनवाई ईआरओ और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) स्तर पर की जाएगी और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देश पर सीईओ कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी अलग-अलग जिलों में स्थलीय निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा मतदाताओं की शिकायतों का मौके पर समाधान किया जा सके।

जिलावार अधिकारियों की जिम्मेदारी इस प्रकार तय की गई है:

  • अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे को देहरादून और हरिद्वार जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चन्द्र दुम्का को नैनीताल, अल्मोड़ा, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों का दायित्व दिया गया है।
  • उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों की निगरानी सौंपी गई है।
  • सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास को ऊधम सिंह नगर, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।

निर्वाचन विभाग का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी से एसआईआर प्रक्रिया में तेजी आएगी और जिन मतदाताओं के दस्तावेजों या रिकॉर्ड में तकनीकी अथवा अन्य प्रकार की विसंगतियां हैं, उनका समय पर समाधान किया जा सकेगा। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल प्रक्रियागत कारणों से प्रभावित न हो।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बीच चुनाव आयोग ने 5.26 लाख अनमैप्ड मतदाताओं के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। प्रदेशभर में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती और फील्ड निरीक्षण के माध्यम से आयोग पारदर्शी, निष्पक्ष और मतदाता हितैषी प्रक्रिया सुनिश्चित करना चाहता है। प्रशासन का प्रयास है कि वास्तविक पात्र मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी मामलों का नियमानुसार शीघ्र निस्तारण किया जा सके।

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