स्थान: हरिद्वार
तारीख: 4 अगस्त 2026
हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में मंगलवार को आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिवस पारंपरिक रूप से ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर हवन-यज्ञ और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें योगगुरु स्वामी रामदेव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पतंजलि परिवार के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे सभी चिकित्सा पद्धतियों में अत्यंत प्रभावी बताया।
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में स्वामी रामदेव ने कांवड़ यात्रा को लेकर शिवभक्तों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि सभी कांवड़िए पूरी श्रद्धा, अनुशासन और कानून का पालन करते हुए अपनी यात्रा संपन्न करें। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संयम और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि प्रत्येक हिंदू के जीवन में शिवत्व, रामत्व, कृष्णत्व और देवत्व के गुणों का समावेश होना चाहिए। उनके अनुसार समाज में जातीय, धार्मिक या राजनीतिक उन्माद से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मूल्यों और सदाचार से सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा मजबूत होगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से मां गंगा में आस्था के साथ स्नान करने और गंगाजल भगवान शिव को समर्पित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं से नशामुक्त यात्रा का भी आह्वान किया। स्वामी रामदेव ने कहा कि भगवान शिव को नशे से जोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिवभक्तों को भांग, गांजा, धतूरा, सुल्फा, बीड़ी, सिगरेट या किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए। उनके अनुसार हिंसा, तोड़फोड़ और नशा शिव भक्ति की भावना के विपरीत है तथा प्रत्येक श्रद्धालु को शांतिपूर्ण और मर्यादित व्यवहार अपनाना चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने संसद परिसर में सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या पंथ के प्रतीकों का उपयोग इस प्रकार नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उसकी गरिमा पर आंच आए।
स्वामी रामदेव ने कहा कि राजनीतिक विषयों पर विरोध या अपनी बात रखने का प्रत्येक व्यक्ति को लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी भी धार्मिक प्रतीक या आस्था का अपमान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र सनातन परंपरा और आध्यात्मिक संस्कृति का प्रतीक है तथा इसका सम्मान बनाए रखा जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने के अनेक संवैधानिक माध्यम उपलब्ध हैं, इसलिए किसी भी राजनीतिक मुद्दे को उठाने के लिए धार्मिक प्रतीकों को विवाद का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार सभी धर्मों और उनकी आस्थाओं का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उल्लेखनीय है कि सांसद पप्पू यादव ने राम मंदिर चंदा गबन से जुड़े मुद्दे को लेकर संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी रामदेव ने अपने विचार व्यक्त किए और धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।
निष्कर्ष
हरिद्वार में आयोजित जड़ी-बूटी दिवस कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने एक ओर जहां कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण, अनुशासित और नशामुक्त बनाने का संदेश दिया, वहीं संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने धार्मिक आस्था और प्रतीकों के सम्मान पर बल देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक विरोध दर्ज कराया जा सकता है, लेकिन किसी भी धर्म या उसके प्रतीकों की गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


