स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 06 अगस्त 2026
उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया अब राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन गई है। करीब 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होने और बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा होने के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सुनियोजित तरीके से उसके समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया करार दिया है।
पहले चरण में 8.26 लाख नाम हटे, दूसरे चरण में 19 लाख से अधिक को नोटिस
चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के पहले चरण में एएसडीडी (Absent, Shifted, Death, Duplicate) श्रेणी में आने वाले 8 लाख 26 हजार 977 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को जारी अनंतिम मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 71 लाख 33 हजार 785 मतदाता दर्ज किए गए।
अब दूसरे चरण में मतदाता विवरणों में विसंगति पाए जाने पर 19 लाख 4 हजार 380 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा, जिन मतदाताओं की पहले चरण में मैपिंग नहीं हो सकी थी, उन्हें भी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस भेजे गए हैं।
24 लाख नोटिसों में से 19 लाख से अधिक पहुंचाए गए
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार प्रदेश में करीब 24 लाख नोटिस जारी किए जाने थे, जिनमें से लगभग 19 लाख नोटिस बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के माध्यम से संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं।
अब तक चुनाव आयोग को विभिन्न श्रेणियों के आवेदन भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें—
- फॉर्म-6: लगभग 93 हजार आवेदन
- फॉर्म-7: करीब 1 लाख 39 हजार आवेदन
- फॉर्म-8: 40 हजार से अधिक आवेदन
फॉर्म-7 के सभी मामलों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) स्तर पर जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
फॉर्म-7 को लेकर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि विशेष रूप से कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री (संगठन) राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने निष्पक्ष प्रक्रिया का भरोसा दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके विपरीत स्थिति दिखाई दे रही है। उनका दावा है कि फॉर्म-7 के माध्यम से व्यवस्थित तरीके से कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब भी फॉर्म-7 के जरिए किसी मतदाता का नाम हटाने का आवेदन किया जाता है, तो चुनाव आयोग के पोर्टल पर फॉर्म-10 स्वतः जनरेट होता है, जिसमें आवेदनकर्ता और कारण का पूरा विवरण दर्ज होता है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिलता है। कांग्रेस का कहना है कि यदि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिए स्पष्ट निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि दावा एवं आपत्ति की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि—
- एक सामान्य मतदाता अधिकतम पांच दावे या आपत्तियां प्रस्तुत कर सकता है।
- राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म जमा कर सकते हैं।
- यदि पुनरीक्षण अवधि में 30 से अधिक फॉर्म जमा किए जाते हैं तो संबंधित ईआरओ स्वयं विस्तृत जांच करेंगे।
उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि सामान्य विसंगति वाले मामलों का निस्तारण बीएलओ स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन कर किया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। वहीं जिन मामलों में मैपिंग नहीं हो सकी है, उनमें ईआरओ और एईआरओ स्तर पर सुनवाई कर नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बुधवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पूरी प्रक्रिया की समीक्षा भी की और उनसे सुझाव प्राप्त किए।
भाजपा ने कहा—यह केवल सत्यापन की प्रक्रिया
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन 19 लाख मतदाताओं को नोटिस दिए गए हैं, उनसे केवल पहचान एवं दस्तावेजों का सत्यापन मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी का नाम स्वतः नहीं काटा जा रहा है। केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई होगी, जहां आवश्यक प्रमाण उपलब्ध नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और इससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भाजपा का पलटवार—कांग्रेस फैला रही भ्रम
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुंदन परिहार ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण पूरी तरह चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है और इसमें किसी राजनीतिक दल की कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के बीच सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने का कार्य कर रही है, जबकि कांग्रेस हर मुद्दे पर भ्रम और नकारात्मक राजनीति करने में लगी हुई है।
कांग्रेस का जवाब—आंकड़े खुद बता रहे हैं स्थिति
भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि यदि प्रदेश में लाखों मतदाताओं के नाम कट चुके हैं और करीब 19 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं तो इन आंकड़ों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक चाहता है कि उसका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहे। इसलिए कांग्रेस केवल मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग कर रही है।
विधायक भुवन कापड़ी ने जांच और कार्रवाई की मांग की
खटीमा से कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल कर मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने इस संबंध में एसडीएम को शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कापड़ी ने चेतावनी दी कि यदि जांच में फर्जी आपत्तियां सही पाई गईं तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ कांग्रेस राज्यव्यापी आंदोलन भी करेगी। उन्होंने आशंका जताई कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से पात्र मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा सकता है।
प्रमुख लोगों को भी मिले SIR नोटिस
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई चर्चित लोगों को भी नोटिस जारी हुए हैं। नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और भाजपा विधायक सरिता आर्या को भी दस्तावेज सत्यापन के लिए एसआईआर नोटिस प्राप्त हो चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि सत्यापन प्रक्रिया विभिन्न श्रेणियों के मतदाताओं पर समान रूप से लागू की जा रही है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में चल रही एसआईआर प्रक्रिया अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गई है। एक ओर कांग्रेस मतदाताओं के नाम हटाने की आशंका जता रही है, वहीं भाजपा इसे पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध प्रक्रिया बता रही है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की जांच, दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उठाए जा रहे आरोपों में कितना दम है। फिलहाल प्रदेश की राजनीति में फॉर्म-7 और मतदाता सत्यापन सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभर रहा है।


